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Special Report: अफगान राष्ट्रपति चुनाव भारत के हित में

राष्ट्रपति अशरफ गनी
फोटो सौजन्य- गूगल

नई दिल्ली। भारत के नजरिये से काफी अहमियत रखने वाले अफगानिस्तान के राष्ट्रपति चुनावों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि अमेरिका और तालिबान के बीच यदि बातचीत फलीभूत होती है तो वहां राष्ट्रपति चुनाव रद्द करने होंगे। इसके बावजूद अफगानिस्तान के विभिन्न राजनीतिक गुट राष्ट्रपति चुनाव के लिये जोरशोर से प्रचार अभियान जारी रखे हुए हैं। राष्ट्रपति चुनाव 28 सितम्बर को निर्धारित किए गए हैं।





यहां भारतीय राजनयिक हलको में कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान में संविधान के अनुरुप नई सरकार का गठन होना चाहिये। लेकिन तालिबान ने तानाशाही रूख दिखाते हुए कहा है कि वह किसी चुनाव में भरोसा नहीं करता। अफगानिस्तान में पाकिस्तान अपनी रणनीति के अनुरुप नई सरकार के गठन की भरसक कोशिश कर रहा है।

यहां मिली रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति चुनावों के लिये दो प्रत्याशियों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। ये हैं मौजूदा राष्ट्रपति अशरफ गनी और चीफ एक्जीक्युटिव  ऑफिसर अब्दुल्ला अब्दुल्ला। दोनों चूंकि मौजूदा सरकार में दो सबसे अग्रणी नेता हैं इसलिए आगामी चुनाव काफी रोचक हो गए हैं। हालांकि इस होड़ में एक तीसरा प्रत्याशी पीस एंड मोडरेशन टीम के नेता मोहम्मद हनीफ आत्मर भी उभर रहा है।  इनके अलावा अफगानिस्तान के उत्तर में बाल्ख प्रांत के मजबूत नेता अट्टा मोहम्मद नूर हैं जो जमायते इस्लामी के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। राष्ट्रपति के अलावा प्रधानमंत्री का पद बनाए जाने को लेकर अफगानी दलों में पैदा विवाद के बाद हनीफ आत्मर ने अपना चुनाव प्रचार बद कर दिया है।

 इस वजह से राष्ट्रपति चुनाव के लिये दो मजबूत उम्मीदवार मौजूदा राष्ट्रपति और चीफ एक्जीक्युटिव उभर चुके हैं।

 चुनाव होने में अभी एक महीना से अधिक वक्त बाकी है और इस बीच अफगानिस्तान की सत्ता तालिबान के प्रभुत्व वाले लोगों को सौंपी गई तो राष्ट्रपति चुनाव रोक दिये जाएंगे। माना जा रहा है कि तालिबान फिर पुरानी प्रथा पर लौटेगा और अफगानिस्तान के ‘अमीर’ का पद सृजित कर देश का शासन उसके हाथों सौंपेगा।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति चुनाव रोकने की मांग तालिबान ने की है और अमेरिका से यह शर्त रखी है कि तालिबान के साथ कोई शांति समझौता होने के पहले अफगानिस्तान में राष्ट्रपति का चुनाव रोकना होगा। राजनयिक हलकों में इन सम्भावनाओं को लेकर गहरी चिंता है कि अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी से भारत के सुरक्षा हितों पर भारी प्रतिकूल असर पड़ेगा। भारत ने अफगानिस्तान के पुर्ननिर्माण में तीन अरब डॉलर से अधिक के निवेश किये हैं।

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