DEFENCE

स्पेशल रिपोर्ट: दक्षिण कोरिया से रक्षा रिश्ते औऱ गहरे होंगे, साझा कार्यदल बना

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून और पीएम मोदी

नई दिल्ली।  दक्षिण कोरिया से के-9 वज्र होवित्चर तोपों के भारत में उत्पादन करने का समझौता जमीन पर उतरने के साथ ही भारत और दक्षिण कोरिया ने आपसी रक्षा सहयोग औऱ गहरा करने का संकल्प लिया है।  भारत में कोरियाई रक्षा साज सामान के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये एक संयुक्त कार्यदल भी गठित करने का फैसला किया गया है।





 रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिये दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए इन के साथ यहां मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बातचीत के दौरान दक्षिण कोरिया की दूसरी कम्पनियों को भी भारत आ कर निवेश करने और अपना उत्पादन केन्द्र बनाने पर चर्चा की गई।

 इस बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ाने और मेक इन इंडिया के तहत भारत में रक्षा साज सामान बनाने का निमंत्रण दोहराया। उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरिया की कम्पनी हानह्वा टेकविन ने भारतीय कम्पनी लार्सन एंड टूब्रो के साथ होवित्जर तोपों के भारत में उत्पादन का समझौता किया था। इसके तहत रक्षा मंत्रालय ने दोनों कम्पनियों को 155 मिमी. की  एक सौ होवित्जर तोपों के उत्पादन का 45 सौ करोड़ रुपये का ठेका दिया था।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मून ने आपसी बातचीत के साथ ही दोनों देशों के अग्रणी उद्योगपतियों की साझा बैठक भी की जिसमें दोनों देशों के अग्रणी हथियार कम्पनियों के सीईओ भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मून ने आपसी रक्षा सहयोग को गहरा करने के लिये समुद्री पोतों और जहाजों के भारत में निर्माण के लिये एक कार्यदल बनाने पर भी सहमति दी।

दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद  विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नौ समझौतों के अलावा एक विजन डॉक्यूमेंट भी जारी किया गया जिसमें भारत और दक्षिण कोरिया के बीच स्पेशल स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप को औऱ गहराई देने के लिये संकल्प जाहिर किया गया ।  इसमें किसी देश का नाम लिये बिना कानून के शासन.और एक स्थिर सुरक्षित, समावेशी औऱ नियम आधारित क्षेत्र पर जोर दिया गया।  दोनों देशों ने सम्प्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का भी सम्मान किये जाने पर जोर दिया।

विजन डॉक्यूमेंट में समुद्री नौवहन की आजादी औऱ  बेरोकटोक उड़ान और निर्बाध समुद्री व्यापार सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। किसी खास इलाका या  चीन या किसी देश का नाम विजन डॉक्यूमेंट में नहीं लिया गया है लेकिन  इसके पहले भारत द्वारा  दूसरे देशों के साथ जारी साझा बयानों में  दक्षिण चीन सागर का जिक्र किया जाता रहा है।

भारत ने कहा कि अपनी ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी में दक्षिण कोरिया को वह अहम साझेदार मानता है। इसी तरह दक्षिण कोरिया भी अपनी दक्षिणी नीति में भारत को केन्द्रीय खम्भा मानने की बात की  है। दोनों नेताओं ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते क्षेत्र में शांति व स्थिरता को बढ़ावा देंगे।

विजन डॉक्यूमेंट में आतंकवाद और उग्रवाद का भी जिक्र किया गया। दोनों देशों ने कहा कि आतंकवाद और उग्रवाद से विश्व शांति औऱ सुरक्षा को खतरा पहुंचता है।  भारत और दक्षिण कोरिया ने अफगानिस्तान में साथ मिलकर कार्यक्रमों को चलाने का भी संकल्प जाहिर किया।

गौरतलब है कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच दो हजार साल पुराना सांस्कृतिक सम्पर्क रहा है। सन 48 में अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना कोरिया गई थी जहां उनका विवाह कोरिया के राजकुमार से हुआ था। राजकुमारी सुरीरत्ना की याद में अयोध्या में एक स्मारक भी बनाने का फैसला किया गया है।

भारत और अय़ोध्या ने 2030 तक आपसी व्यापार मौजूदा 20 अरब डालर से  कुछ सालों के भतर  दोगुना करने का  लक्ष्य तय किया है।

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