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एक गलती जो नेपाल के दूसरे बड़े पुलिस अफसर को पड़ी भारी

काठमांडू: नेपाल पुलिस के दूसरे सबसे बड़े पुलिस अधिकारी डीआईजी नवराज सिलवाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें सरकारी दस्तावेजों को प्राप्त करने और उनसे छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, नेपाल प्रहरी के प्रवक्ता ने उनकी गिरफ्तारी की नहीं बल्कि उनसे पूछताछ के लिए उन्हें हिरासत में लेने की बात कही है। इस बीच सर्वोच्च अदालत ने नवराज सिलवाल को हिरासत से मुक्त करने का आदेश दिया है ।





प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की की एकल (सिंगल) इजलास ने सोमवार को यह आदेश दिया है। सुबह नेपाल पुलिस द्वारा ललितपुर के सनराइज होम स्थित आवास से गिरफ्तार किए गए सिलवाल ने गैरकानूनी तरीके से पकड़े जाने का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता पूर्ण प्रसाद राजबंशी के मार्फत रिट दायर की थी।

आपको बता दें कि कुछ समय पहले पहले वरीयता के हिसाब से सिलवाल को नेपाल पुलिस का प्रमुख एवं आईजीपी (पुलिस महारीक्षक) नहीं बनाकर तीसरे वरीयता के अधिकारी जयबहादुर चन्द को सरकार ने आईजीपी नियुक्त किया था।

नवराज सिलवाल (फाइल फोटो)

सरकार के इस फैसले को लेकर सिलवाल सबसे सर्वोच्च अदालत में चुनौती देते हुए खुद को पुलिस महारीक्षक नियुक्त करने का मांग की थी। तब अदालत ने डीआईजी की मांग को अनुचित करार देते हुए पुलिस महारीक्षक नियुक्ति को पुनरावलोकन करने लिए सरकार को आदेश दिया था।

उसके बाद सरकार ने दूसरी वरीयता के अधिकारी प्रकाश अर्याल का मूल्यांकन बेहतर होने की वजह को उन्हें आईजीपी नियुक्त किया था। अर्याल की नियुक्त के बाद भी सिलवाल ने कानूनी लड़ाई जारी रखी थी। इस बीच उन पर आरोप लगा कि उन्होंने गलत तरीके से कुछ सरकारी दस्तावेज हासिल किए और उनके साथ छेड़छाड़ की।

जयबहादुर चन्द (बाएं) और नवराज सिलवाल

वैसे भी अगर देखा जाए तो जयबहादुर चन्द बेशक तीसरी वरीयता के अधिकारी हैं लेकिन उनकी कार्य कुशलता सिलवाल से कहीं ज्यादा बेहतर है। जय बहादुर चन्द को उनकी अच्छी सेवा के लिए ‘नेपाल प्रहरी पदक’ भी दिया जा चुका है। इतना ही नहीं अनुभव के मामले में भी नवराज सिलवाल पर जय बहादुर चन्द ज्यादा भारी पड़ रहे हैं।

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