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कतर के रिश्ते आतंकियों से, 6 मुस्लिम देशों ने तोड़े संबंध

क़तर

दोहा। छह मुस्लिम बहुल देशों ने कतर के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लिए हैं जिनमें सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन, यमन, लीबिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इन देशों ने कतर पर इस्लामिक स्टेट और अलकायदा का समर्थन करने का आरोप लगाया है। लेकिन कतर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। यह जानकारी सोमवार को मीडिया रिपोर्ट से मिली। उधर पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने आज कहा कि क़तर के साथ राजनयिक सम्बन्ध तोड़ने की तत्काल उसकी कोई योजना नहीं है।





  • कतर के राजनयिकों को 48 घंटे के अंदर देश छोड़ने का फरमान

बीबीसी के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात ने कतर के राजनयिकों को 48 घंटे के अंदर देश छोड़ने का फरमान जारी कर दिया है। संयुक्त अरब अमीरात ने कतर जाने वाली अपनी उड़ानें भी स्थगित कर दी हैं। उधर, यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व में हूती विद्रोहियों से लड़ रहे गठबंधन ने क़तर को गुट से अलग कर दिया है।

सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए के अनुसार, रियाद ने क़तर के साथ अपनी ज़मीनी, हवाई और समुद्री सीमा को बंद कर दिया है। क़तर ने इस क़दम को आधारहीन और अनुचित बताया है।

मिस्र और पांच अन्य मुस्लिम देशों के क़तर से राजनयिक संबंध तोड़ने के इस ताज़ा क़दम को खाड़ी देशों में दरार के तौर पर देखा जा रहा है। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने भी क़तर के जहाज़ों और पोतों के लिए हवाई क्षेत्र और बंदरगाहों को बंद करने की सूचना दी है। बयान में कहा गया है कि क़तर मिस्र के खिलाफ़ शत्रुतापूर्ण रुख़ अख़्तियार करता है।

  • मुस्लिम ब्रदरहुड समेत चरमपंथी संगठनों का समर्थन करने का आरोप

बयान के अनुसार, इसके अलावा क़तर पर मुस्लिम ब्रदरहुड समेत चरमपंथी संगठनों का समर्थन करने और मिस्र की सुरक्षा को निशाना बनाने वाले चरमपंथी ऑपरेशन को प्रश्रय देने का आरोप भी लगाया गया है। बयान में क़तर पर मिस्र के आंतरिक मामलों में दखल देने और अरब देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा करने का आरोप भी लगाया गया है।

इस बीच बहरीन की सरकार संचालित समाचार एजेंसी ने क़तर पर देश के अंदरूनी मामलों में दखल देने का आरोप लगाया है। इससे पहले इन चारों देशों ने क़तर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी की विवादास्पद टिप्पणी प्रसारित करने वाली समाचार वेबसाइट पर रोक लगा दी थी।

जबकि क़तर का कहना है कि शेख तमीम के हवाले से चलाई गई टिप्पणी फ़र्ज़ी थी और समाचार एजेंसी को हैक करने के बाद यह इंटरनेट पर आई थी। कतर के शेख की विवादित टिप्पणी ने कई संवेदनशील क्षेत्रीय मुद्दों को छेड़ा था, लेकिन सबसे ज़्यादा नाराज़गी इसमें सऊदी अरब के धुर विरोधी ईरान की तारीफ और सऊदी अरब की निंदा से थी।

रिपोर्टों के मुताबिक शेख तमीम ने कहा था कि ईरान से अरबों की दुश्मनी का कोई कारण नहीं है और इजरायल से हमारे रिश्ते अच्छे हैं। संयुक्त अरब अमीरात का यह क़दम ईरान के साथ बढ़े तनाव के बीच उठाया गया है। कतर, मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी का भी पुरजोर समर्थक और सीरिया में इस्लामी विद्रोही समूहों का समर्थक माना जाता रहा है।

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