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कश्मीर पर अमेरिकी मध्यस्थता को भारत ने किया खारिज

ट्रम्प प्रशाशन

इस्लामाबाद। जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच चली आ रही तनातनी को रोकने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता की कोशिश को भारत ने जहां सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं इस्लामाबाद ने इसके लिए हामी भर दी है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली।





उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने मंगलवार (5 अप्रैल) को जम्मू-कश्मीर पर अपनी तटस्थ नीति में परिवर्तन के संकेत देते हुए इस मसले पर दोनों पड़ोसी देशों के बीच मध्यस्थता करने के संकेत दिए थे।

अमेरिका ने कहा था कि वह भारत तथा पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने के प्रयासों में अपनी ‘जगह बनाने की कोशिश’ करेगा। अमेरिका ने कहा कि वह कुछ घटित होने का इंतजार नहीं करेगा। हालांकि भारत ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत जम्मू-कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा मानता है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भागीदारी का पुरजोर विरोध करता रहा है।

भारत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी और संगठन पाकिस्तान से आतंकवाद के खात्मे के लिए प्रयत्न करेगा, क्योंकि यह पूरे क्षेत्र की शांति के लिए बड़ा खतरा है।

उधर वाशिंगटन में पाकिस्तान के दूत एजाज अहमद चौधरी ने समाचार पत्र ‘द डॉन’ से अमेरिका के प्रस्ताव पर कहा, ‘दक्षिण एशिया में शांति और स्थायित्व के लिए अमेरिका की किसी भी सकारात्मक भूमिका का क्षेत्र पर अच्छा असर पड़ेगा।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस तरह के प्रयासों में रुचि रखता है, क्योंकि इस्लामाबाद भी भारत के साथ अच्छा रिश्ता रखना चाहता है।

उधर, पाकिस्तान गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारा मानना है कि भारत और पाकिस्तान को आपसी तनाव कम करने के लिए सीधी बातचीत करनी चाहिए।’

विदित हो कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के मसले पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का स्वागत करता रहा है और संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है। पाकिस्तान अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र से कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए प्रयास करने का आग्रह करता रहा है।

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