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अमेरिका ही नहीं, चीन को भी होने लगी है कारोबारी जंग की चुभन

ट्रंप और शी जिनपिंग

लॉस एंजेल्स से ललित मोहन बंसल…

अमेरिका और चीन के बीच कारोबारी जंग की चुभन दोनों देशों के किसान, व्यापारियों और ग्राहकों को महसूस होने लगी है। यह जंग अभी प्रारम्भिक चरण में है और दोनों ओर से मात्र 34-34 अरब डालर पर टिकी हुई है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आक्रामक रवैए को देखते हुए अगले महीने से यह दो सौ अरब डालर तक पहुँच सकती है। ट्रम्प प्रशासन ने चीन से आयातित क़रीब एक हज़ार उत्पादों की सूची तैयार की है, जिससे अमेरिका के वालमार्ट और कास्को सहित एक दर्जन बड़े स्टोर बढ़ी हुई क़ीमतों की चपेट में आ सकते हैं। लेकिन इस के साथ ही चीन की सूई से लेकर टेलीविजन तक बड़ी औद्योगिक इकाइयों में माल की निकासी और इकाइयों में छँटनी को लेकर बेरोज़गारी का संकट खड़ा हो सकता है।





दुनिया के शेयर बाजारों में मच सकती है उथल-पुथल

यह जंग आगे बढ़ती है, तो संभव है, चीन अमेरिकी ट्रेज़री से अपने एक खरब दो सौ अरब के बांड उठा ले तो विश्व स्टाक मार्केट में उथल-पुथल मच सकती है। अमेरिकी अर्थशास्त्रियों का कथन है कि वह समय अभी आया नहीं है। फिर चीन के पास यूरोप, अफ़्रीका और लेटिन अमेरिका आदि में चालीस से अधिक मंडियाँ हैं, जहाँ वह अपना माल खपा सकता है।

अमेरिका को हो रहा है हर साल 355 अरब डालर का नुकसान

अमेरिका और चीन के बीच 505 अरब डालर के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अमेरिका को 355 अरब डालर की सालाना क्षति हो रही है। ‘अमेरिका फर्स्ट नीति’ के अंतर्गत ट्रम्प प्रशासन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जोड़ कर देख रहा है। हालाँकि अमेरिका के विभिन्न स्थानों पर विरोध होने लगा है।

कीमतों में गिरावट से किसान, मजदूर औऱ व्यापारी परेशान

प्रारम्भिक चरण की जंग में अमेरिका के मिड ईस्ट में ओहायो, इलिनोईस और इंडियाना सहित सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी से प्रभावित पंद्रह राज्यों में ख़ास कर सोयाबीन, सूअर के मांस तथा सी फ़ूड की क़ीमतों में गिरावट को लेकर इन राज्यों के किसान, खेतीहर मज़दूर और सोया  व्यापारी परेशान हैं, तो उधर इन उत्पादों पर चीन की निर्भरता और इन खाद्य उत्पादों पर चीन की सरकार की ओर से लगाए गए 25 प्रतिशत सीमा शुल्क से चीनी व्यापारी और उपभोक्ता भी हताश निराश हैं। अमेरिका से इन खाद्य उत्पादों पर चीन की सरकार ने जब सीमा शुल्क लगाए थे, तब चीनी मस्तिष्क में सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को अगली नवम्बर में होने वाले मध्यावधि चुनाव में पटकी देना भर था। इन खाद्य उत्पादों की चीन में भारी कमी और क़ीमतों में वृद्धि से चीनी समुदाय में हताशा और निराशा बढ़ने लगी है।

चीन सरकार ने किसानों से की सोयाबीन उगाने की अपील

अमेरिका के मिड ईस्ट में ओहायो, इलिनोईस और इंडियाना आदि कुछ ऐसे बड़े राज्य हैं, जहाँ सोयाबीन के पाँच सौ से दो हज़ार एकड़ के फ़ार्म है। अमेरिका एक तिहाई घरेलू खपत के पश्चात शेष सोया चीन, मेक्सिको और कनाडा आदि देशों को निर्यात कर देता है। रिपब्लिकन बहुल इन राज्यों से सोया के निर्यात में कमी और अमेरिका में बफ़र स्टाक से सोए की क़ीमतों में कमी से अमेरिकी किसान और व्यापारियों को चुभन हो रही है, लेकिन चीनी उपभोक्ताओं को सोया की कमी से इसकी क़ीमतों में वृद्धि की मार भी झेलने को विवश होना पड़ रहा है। अमेरिका से चीन 14 अरब डालर मूल्य का एक सौ मिलियन टन सोया ख़रीदता है, जबकि मेक्सिको मात्र पाँच मिलियन टन ही ख़रीदता है। सोया की कमी को देखते हुए चीन ने ‘वी चैट’ पर किसानों को संदेश दिया है कि वे मक्का की जगह सोयाबीन उपजाएँ और सब्सिडी पाएँ। चीन सोया का इस्तेमाल कुकिंग तेल के अलावा प्रोटीन युक्त खाद्य के रूप में आम जनता और पशुओं को आहार के रूप में किया जाता है।

चीन सूअर के मांस के आयात में बेबस

अमेरिका से आयातित खाद्य उत्पादों में सोया के बाद सूअर के मांस के आयात में भी चीन को  मूँह की खानी पड़ रही है। अमेरिका से आयात करने वाली चीनी कम्पनी के शेयर की क़ीमतों में दस प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। चीन ने गत 22  मार्च को सूअर के मांस के विभिन्न उत्पादों पर 6 जुलाई से सीमा शुल्क में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। अब उसे अपने घर में इन दोनों खाद्य उत्पादों की कमी कचोटने लगी है। चीन ने पिछले साल अमेरिका से तीन लाख टन सूअर का प्रसंस्कृत मांस ख़रीदा था। सूअर के मांस के 128  विभिन्न उत्पाद हैं। चीन को इतनी बड़ी मात्रा में सूअर का प्रसंस्कृत उत्पाद मिलने में कठिनाई हो रही है। अमेरिका से सूअर का मांस आयात करने वाले देशों में चीन एक बहुत बड़ा ख़रीदार है। चीन के बाद अमेरिका सूअर के माल का निर्यात जापान को करता है। चीन को उपयुक्त मात्रा में सूअर के सभी प्रसंस्कृत उत्पादों के मिलने में कठिनाई हो रही है। भारत ख़ुद बेल्जियम, श्रीलंका, इटली और नीदरलैण्ड आदि देशों से आयात करता है, जो पाँच सितारा होटल, रेस्तराँ में जाता है। उत्तर पूर्वी राज्यों, बिहार, पश्चिम बंगाल, गोआ और केरल में इसकी खपत ज़्यादा है। चीन के लिए अमेरिका से सूअर के मांस का आयात हांगकांग स्थित एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी डब्ल्यू एच अपनी एक अमेरिकी साझीदार ‘स्मिथ फ़ील्ड’ के मार्फ़त करती है। माल की कमी के कारण इसके शेयर की क़ीमत दस प्रतिशत गिर गई है। चीन ने गत 22 मार्च को इस अमेरिकी उत्पाद पर 25 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाया था। स्मिथ फ़ील्ड कम्पनी के चेयरमैन सुलीवान ने दावा किया है कि इसकी दुनिया में 40 मंडियाँ हैं। वह जल्द ही व्यवस्था कर लेंगे।

 

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