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जाधव की मां को वीजा ना मिलने पर भड़कीं सुषमा स्वराज

सुषमा-स्वराज

नई दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण की मां द्वारा लगाई गई वीजा एप्लिकेशन अभी तक पेंडिंग पड़ी हुई है, लेकिन पाकिस्तान सरकार उस पर ध्यान नहीं दे रही है। सुषमा ने सोमवार को ट्वीट किया, ‘कुलभूषण की मां अवंतिका जाधव अपने बेटे से मिलना चाहती है, जिसे पाकिस्तान ने मौत की सजा सुनाई है। मैंने पाकिस्तान फॉरेन अफेयर्स एडवाइजर सरताज अजीज को पर्सनल पत्र लिखकर कुलभूषण की मां को वीजा देने की मांग की, लेकिन उन्होंने पत्र पर कोई ध्यान देने की जरूरत भी नहीं समझी।’





गौरतलब है कि पाकिस्तान ने जाधव को भारत का जासूस बताते हुए पिछले साल गिरफ्तार किया था। मिलिट्री कोर्ट ने 08 मई को उसे फांसी की सजा सुनाई थी। भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में इसके खिलाफ अपील की थी, ICJ ने कुलभूषण की फांसी की सजा पर अंतिम फैसला लेने तक रोक लगा दी थी।

मेडिकल वीजा मांगने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को दिलाया भरोसा

सुषमा स्वराज से पाकिस्तानी नागरिकों ने इलाज के लिए वीजा दिलवाने की अपील की थी। उसी पर सुषमा ने ट्वीट किया, ‘उन सभी पाकिस्तानी नागरिकों के लिए मेरे दिल में संवेदनाएं हैं, जो भारत में इलाज के लिए वीजा चाहते हैं। सुषमा ने लगातार करीब नौ ट्वीट कर अपनी बात कही उन्होने कहा, मुझे यकीन है कि सरताज अजीज भी अपने देश के लोगों के बारे में सोच रहे होंगे, उन्हें सिर्फ इतना करना है कि पाकिस्तानी नागरिकों को मेडिकल वीजा दिए जाने को मंजूरी दे दें। मुझे ऐसा कोई कारण नहीं समझ में आता है, जिसकी वजह से वे अपने ही लोगों को इजाजत देने से हिचक रहे हैं। उन्होंने कहा ‘मैं पाकिस्तानी नागरिकों को भरोसा दिलाती हूं कि सरताज अजीज की मंजूरी के साथ जिन्होंने वीजा एप्लीकेशन के लिए अप्लाई किया है, उन्हें हम तुरंत वीजा की मंजूरी देंगे।’

कैंसर पीड़ित महिला ने की थी वीजा की मांग

पाकिस्तान की कैंसर पीड़ित महिला फैजा तनवीर (25) ओरल ट्यूमर (रीकरंट अमेलोब्लास्टोमा) से पीड़ित है, उसने सुषमा को ट्वीट किया- मैम, मेरी जिंदगी बचाने के लिए प्लीज मदद करें। तनवीर ने अपने इलाज के लिए गाजियाबाद के इंद्रप्रस्थ डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को 10 लाख रुपए एडवांस में दिए। लेकिन, इस्लामाबाद में इंडियन हाई कमीशन ने उसकी वीजा एप्लीकेशन रिजेक्ट कर दी थी। भारत ने दिल की बीमारी से जूझ रहे एक पाकिस्तानी बच्चे को मेडिकल जारी कर दिया है। बच्चे की उम्र महज ढाई महीने है। उसके पिता ने 24 मई को सुषमा स्वराज से टि्वटर के जरिए मेडिकल वीजा देने की गुहार लगाई थी

500 पाकिस्तानी हर महीने इलाज के लिए आते हैं

बता दें पिछले कुछ साल से भारत में मेडिकल सुविधाओं में जबरदस्त सुधार हुआ तब से एशियाई देशों के अधिकतर मरीज इलाज के लिए भारत को तवज्जो देते हैं। दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में हर महीने करीब 500 पाकिस्तानी मरीज इलाज के लिए आते हैं। अपोलो में लीवर प्लांट के भी मरीज होते हैं जिस पर आने वाला खर्च करीब 30 लाख रुपए होता है, जबकि यूरोप या बाकी देशों में खर्च छह से सात गुना ज्यादा होता है। वहीँ, भारत में पाकिस्तानी नागरिकों को भाषा की भी ज्यादा दिक्कत नहीं आती। दो साल पहले भी जब सरहद पर हालात ठीक नहीं थे, भारत ने बस्मा नाम की पाकिस्तानी बच्ची को इमरजेंसी मेडिकल वीजा मुहैया कराया था।

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