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इस शख्स ने दुनिया को बचाया परमाणु युद्ध से..

लेफ्टिनेंट कर्नल रहे स्तानिस्लाव पेत्रोव

शीत युद्ध के दौरान जिस शख्स ने दुनिया को परमाणु युद्ध से बचाया था, वह कब दुनिया को अलविदा कह गया इसका पता तक नहीं चला। जी, हां अस्सी के दशक में सोवियत संघ के सैन्य अफसर रहे स्तानिस्लाव पेत्रोव का निधन गत मई में ही हो गया था, लेकिन पता अब चल पाया है। सोवियत सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल रहे स्तानिस्लाव पेत्रोव ने अपनी सूझबूझ से परमाणु युद्ध का खतरा टाल दिया था। अगर जर्मन पत्रकार कार्ल शुमाकर ने उन्हें जन्मदिन की बधाई के लिए फोन न किया होता तो हो सकता है उनकी मौत का पता ही नहीं चलता। 77 वर्षीय ले. कर्नल पेत्रोव का निधन मास्को स्थित अपने घर में ही हो गया था। दुनिया को परमाणु युद्ध से बचाने के पेत्रोव के प्रयास को भी कार्ल शुमाकर ही दुनिया के सामने लाए थे।





दुनिया को विनाश से कैसे बचाया ?

अस्सी के दशक में सोवियत संघ और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर था। वर्ष 1983 में 26 सितंबर के दिन पेत्रोव एक रूसी परमाणु चेतावनी केंद्र पर ड्युटी पर तैनात थे। अचानक कंप्यूटर ने चेतावनी दी कि अमेरिका से कुछ मिसाइलें सोवियत संघ की ओर आ रही हैं। सूचना मिलते ही पेत्रोव कुर्सी से उठ खड़े हुए। सामने स्क्रीन पर स्टार्ट का लाल बटन दिख रहा था। इस बटन को दबाने का सीधा सा एक्शन यह होता कि चार मिसाइलें अमेरिका की ओर बढ़ चलतीं। पेत्रोव के पास सोचने के लिए ज्यादा वक्त नहीं था। पेत्रोव का फैसला दुनिया को विनाशकारी युद्ध की तरफ धकेल सकता था। उनकी ड्युटी कहती थी कि इस चेतावनी के बारे में वे अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित करें। उन्हें सूचित करने का मतलब था कि जवाबी कार्रावाई में सोवियत संघ परमाणु हमला कर सकता था। पेत्रोव ने ठंडे दिमाग से हालात का आकलन किया और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अगर अमेरिका को हमला करना होता तो पूरी ताकत के साथ करता। पेत्रोव ने अपने अधिकारियों को चेतावनी संदेश के बारे में बताने की बजाए यह कहा कि शायद सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी आ गई है। पेत्रोव ने तकनीकी खराबी की बात कह तो दी, लेकिन अगर वह सचमुच मिसाइल होती तो क्या होता। अगर वह सचमुच मिसाइल होती तो 15 मिनट में इसका पता चलता। बरसों बाद पेत्रोव ने एक इंटरव्यू में कहा कि मुझे लगा कि मैं एक तपते हुए तवे पर बैठा हुआ हूं। जब आधा घंटे तक कुछ नहीं हुआ तो पेत्रोव की जान में जान आई।

बाद में पता चला कि कंप्यूटर सिस्टम ने जिसे मिसाइल समझकर अलर्ट भेजा था वह बादलों से गुजरती हुई सूरज की रोशनी थी। बरसों बाद पेत्रोव की यह कहानी सामने आई तो पेत्रोव का सम्मान किया गया।

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