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ये है पाकिस्तान में मौत की सजा पाए कुलभूषण की कहानी!

नई दिल्ली: कुलभूषण जाधव को 3 मार्च 2016 को बलूचिस्तान के चमन इलाके से गिरफ्तार किया गया। ये इलाका पाकिस्तान-अफगानिस्तान की सीमा पर है।





जासूसी के आरोप में भारत के कुलभूषण को पाकिस्तान ने सुनाई मौत की सजा

पाकिस्तान का दावा था कि कुलभूषण भारतीय नौसेना का अधिकारी है और आरोप लगाया कि वह भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के लिए काम कर रहा था। पाकिस्तान ने अपने दावे के सबूत के तौर पर कुलभूषण के पास से कथित तौर पर जब्त किए गए पासपोर्ट (नंबर 19630722) का हवाला दिया जिस पर फोटो तो कुलभूषण की थी लेकिन उसका नाम हुसैन मुबारक पटेल दर्ज था। पासपोर्ट पर यह भी दर्ज था कि वह महाराष्ट्र के सांगली में पैदा हुए और पवई में रहते हैं। पासपोर्ट पर ईरान का वीजा लगा था। उनकी माता का नाम अवन्ती देवी और पिता का नाम सुधीर जाधव है।

पासपोर्ट नंबर L9630722 जिसे पाकिस्तान ने कुलूभूषण जाधव के पास से बरामद करने का दावा किया था

भारत सरकार ने कुलभूषण से संबंधों से इनकार करते हुए कहा था कि कुलभूषण ने नेवी से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली थी और ईरान के तटीय शहर छबाहर में रहते हैं। भारत के अपने नुमाइंदे से कुलभूषण की बात करवाने का प्रस्ताव पाकिस्तान ने ठुकरा दिया था।

भारत के विदेश मंत्रालय ने तब ही कहा था कि कुलभूषण को संभवत: ईरान से अगवा किया गया और उसे प्रताड़ित किया जा रहा है। 29 मार्च 2016 को जाधव का एक वीडियो जारी हुआ जिसमें वह खुद को RAW का अधिकारी बता रहा था। वीडियो जारी करते वक्त पाकिस्तानी सेना के इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन विभाग ने प्रेस कानफ्रेंस की थी। ये वीडियो संपादित किया गया था और इसे बनाने में एक से ज्यादा कैमरे इस्तेमाल किए गए थे। खबर ऐसी थी कि कुलभूषण को तालिबान ने पकड़कर पाकिस्तान सरकार के हाथ बेचा था।

पाकिस्तान कई बार ये आरोप लगा चुका है कि भारत बलूचिस्तान में पाकिस्तान विरोधी गुटों को समर्थन देता है जबकि भारत इसका खंडन करता रहा है। लेकिन ये पहला मौका था जब पाकिस्तान ने सबूत के तौर पर कुलभूषण का वीडियो पेश किया।

कुलभूषण जाधव ने 1987 में नेशन डिफेंस एकेडमी में दाखिला लिया था और 1991 में नौसेना की इंजीनियरिंग शाखा में कमीशन प्राप्त किया।

13 दिसंबर 2001 को भारत की संसद पर हुए हमले के बाद कुलभूषण ने 2003 में खुफिया सूचनाएं इकट्ठा करने का काम किया था। कुलभूषण इसके बाद ईरान चला गया था जहां उसका कारगो व्यवसाय था। भारत को शक है कि कुलभूषण को अगवा करके या किसी बहाने से पाकिस्तान ले जाया गया जहां फर्जी कागजात बनाए गए।

एसीपी रैंक से रिटायर हुए थे कुलभूषण के पिता और चाचा

मुंबई के रहने वाले कुलभूषण जाधव के पिता सुधीर जाधव और चाचा सुभाष जाधव दोनो ही मुंबई पुलिस में बतौर एसीपी रैंक पर रिटायर हुए। कुलभूषण के पिता सुधीर जाधव की इमेज बड़े ही ईमानदार पुलिस अधिकारी थी। उनके पुलिसिया करियर में कभी विवाद नहीं हुआ। डिलाईल रोड में जहां आज क्राईम ब्रांच की यूनिट 3 का दफ्तर है, उसी के ऊपर पुलिस क्वाटर्स में पहली मंजिल पर सुधीर जाधव का घर था।

सुधीर जाधव की मराठी के सांस्कृतिक, सामाजिक और कलाजगत से जुड़े लोगों से अच्छी दोस्ती थी और ये लोग अक्सर पूजा इत्यादि जैसे पारिवारिक समारोह में शिरकत करने के लिये उनके घर आते थे। कुलभूषण अपने माता-पिता और बहन के साथ यहीं रहते थे।

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