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कुलभूषण केस : शेरी ने की अपने ही देश की ऐसी-तैसी

कुलभूषण जाधव केस

नई दिल्ली। भारतीय नागरिक और पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में पाकिस्तान सरकार की किरकिरी होने के बाद जहां एक ओर पाकिस्तानी पैरोकारों की आलोचना हो रही है वहीं राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी दल पाकिस्तानी पीपल्स पार्टी की उपाध्यक्ष और सीनेटर शेरी रहमान ने जाधव मुद्दे पर विवाद खड़ा कर दिया है। इस बीच, भारत और पाकिस्तान के नुमाइंदों की 8 जून को ICJ के अध्यक्ष के साथ होने वाली कुलभूषण मामले पर बैठक में आगे अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तय होगी।





पाकिस्तानी मीडिया में छपी खबरों में कहा गया है कि पाकिस्तान इस केस के लिए तदर्थ आधार पर एक जज के मनोनयन के लिए कह सकता है। ICJ के नियमों में ऐसा प्रावधान है कि खंडपीठ में उस देश का व्यक्ति बतौर जज शामिल किया जा सकता है अगर उस राष्ट्रीयता का कोई जज पहले से बेंच में न हो।

कुलभूषण जाधव मामला

कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान में घमासान मचा है

वैसे इस मामले में पाकिस्तान की संसदीय समिति के कुछ सदस्य अटार्नी जनरल अश्तर औसफ अली की तरफ से दिए गए स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं दिखाई दिए। अटार्नी जनरल की रिपोर्ट के बाद राष्ट्रीय असेम्बली के स्पीकर ने मीडिया को जानकारी दी कि वह संतुष्ट हैं।

दूसरी तरफ शेरी रहमान का कहना है कि स्पीकर सादिक ने संसदीय समिति के सदस्यों से उतनी ही जानकारियां साझा कीं जितनी पहले से ही सबको पता हैं और उनके जवाब भी संतोषजनक नहीं थे। शेरी ने कहा कि उन्होंने बहुत सारी गलतियाँ की हैं। संसदीय समिति की अब तीसरी बैठक 15 जून को होगी।

शेरी रहमान को कुलभूषण जाधव के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है, न ही उन्होंने भारत के पक्ष की बात कही लेकिन इस मामले पर अपने देश की सरकार को जरूर कटघरे में खड़ा कर दिया। शेरी का कहना है कि पाकिस्तान ने इस केस को बिगाड़ दिया है। शेरी के मुताबिक़ पहली बात तो यह कि पाकिस्तान ने ICJ के मौजूद प्रावधानों के अनुच्छेद 31 के तहत तदर्थ आधार पर जज मनोनीत करने का मौक़ा इस्तेमाल नहीं किया। दूसरा, पाकिस्तान ICJ की तय तारीख के मुताबिक़ 15 मई तक जवाब दाखिल नहीं कर सका और उस पर ICJ के अधिकार क्षेत्र पर सवाल खड़ा कर दिया।

शेरी रहमान के मुताबिक़ पाकिस्तान ने ICJ में ऐसा वकील खड़ा किया जिसे अंतर्राष्ट्रीय केस लड़ने का पर्याप्त तजुर्बा नहीं है। इससे पहले भी मुखर हुई शेरी ने सवाल खड़ा किया था कि पाकिस्तानी वकील को ICJ ने अपनी बात कहने के लिए डेढ़ घंटा दिया था लेकिन वकील एक घंटा भी नहीं बोल पाए और अपनी दलील सिर्फ 50 मिनट में ही निपटा दी।

दूसरी तरफ पाकिस्तान बार कौंसिल की कार्यकारिणी के सदस्य राहील कामरान शेख को ये कहते सुना गया कि अंतर्राष्ट्रीय केस में पाकिस्तान की सफलता मात्र दो फीसदी है जबकि भारत 60 फीसदी केस जीत लेता है।

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