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शरीफ की इस कार्रवाई पर पाकिस्तान आर्मी बिफरी

नवाज-शरीफ

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को उनके विश्वस्त सहायक की बर्खास्तगी को लेकर सेना ने उन्हें नीचा दिखाते हुए उनके इस कदम को नकार दिया है। इसके बाद सत्ता के गलियारे में नवाज की खूब किरकिरी हो रही है। पनामा पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट के जांच के आदेश से शरीफ पहले से ही दबाव महसूस कर रहे हैं। अब सेना के रूख से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट से मिली।





उल्लेखनीय है कि भारत से छद्म युद्ध को लेकर सेना और सरकार के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक की सूचना नवाज के विश्वसनीय सहायक सैयद तारिक फातमी ने लीक कर दी थी। इस वजह से शरीफ ने शनिवार को फातमी को बर्खास्त कर दिया था। लेकिन सेना ने सरकार के फैसले को खारिज कर दिया और कहा कि सरकार को इस मामले की जांच करने वाली समिति की सिफारिशों को पूरी तरह से लागू करना चाहिए। सेना की ओर से इस आशय की प्रतिक्रिया आते ही नवाज सरकार ‘डैमेज कंट्रोल’ में जुट गई है।

तारिक-फातमी

विश्वस्त सहायक सैयद तारिक फातमी की बर्खास्तगी को सेना ने नकार दिया है (फाइल फोटो)

 

सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्वीट कर सरकार की कार्रवाई पर असंतोष जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्र की खबर पर कार्रवाई अपर्याप्त है। सेना का कहना है कि जांच समिति की सिफारिशों को लागू करने की वास्तविक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन फातमी को हटाने की अधिसूचना जारी कर दी गई।

उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे पर सेना और सरकार के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं। सैन्य प्रवक्ता की ट्वीट की आलोचना करते हुए गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान ने कहा कि ट्विटर पर प्रतिक्रियाएं देश के लिए घातक हैं। कई अहम मसले हैं और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इनसे ट्वीट के जरिए निपटा जा रहा है। राज्य संस्थान एक दूसरे को ट्वीट के जरिए सूचनाएं नहीं देते हैं। उन्होंने दावा किया कि अभी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

यह मामला अक्टूबर 2016 में भारत से छद्म युद्ध को लेकर सरकार और सेना के बीच हुई थी। इसमें सरकार व सेना के बीच मतभेद उभरने की खबर डॉन अखबार में छपी थी। बैठक में ISI की कार्यप्रणाली को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के भाई शाहबाज शरीफ और तत्कालीन ISI प्रमुख के बीच गर्मागर्म बहस हुई थी।

बैठक की बातें अंग्रेजी अखबार डॉन में प्रकाशित होने पर सेना ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद तत्कालीन सूचना मंत्री परवेज राशिद को नवाज शरीफ ने हटा दिया था। साथ ही अवकाश प्राप्त न्यायाधीश आमिर रज़ा खान की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया था। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में विदेश मामलों के विशेष सहायक तारिक फातमी को सूचना लीक करने के लिए प्रारंभिक तौर पर जिम्मेदार माना है।

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