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किम जोंग उन ने पहली बार दक्षिण कोरिया की जमीन पर रखा कदम, रचेंगे इतिहास !

यह सचमुच ऐतिहासिक लम्हा था। जब दो पड़ोसी देशों के शासक 65 बरस बाद मिलेंगे तो उस लम्हे को ऐतिहासिक ही कहा जायेगा। शुक्रवार को उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन मिले तो माहौल भावुक हो उठा और दोनों काफी देर तक एक-दूसरे से हाथ मिलाते रहे। कोरियाई युद्ध के बाद ऐसा पहली बार हुआ कि उत्तर कोरिया के किसी शासक ने दक्षिण कोरिया की जमीन पर पैर रखा। इतने नजदीक होने के बाद दोनों देशों के शासकों ने मिलने में इतना वक्त लगा दिया। दोनों नेताओं की शिखर वार्ता पनपुनजोम के पीस हाउस में होगी। पनमुनजोम वही गांव है जहां कोरियाई युद्ध के संघर्ष विराम का फैसला हुआ था। यह दक्षिण कोरिया में पड़ता है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच शिखर वार्ता से बहुत कुछ बदलने वाला है।





पैदल पहुंचे पीस हाउस

 

इस शिखर वार्ता के लिए उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन कार से सीमा पर पहुंचे। वहां से वह पैदल पीस हाउस तक पहुंचे। पनमुनजोम में दोनों देशों को अलग करने वाली सीमा रेखा पार करने के बाद किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन से हाथ मिलाया और दोनों नेताओं ने कुछ देर के लिए उत्तर कोरिया की सीमा में कदम रखा। उत्तर कोरिया की सीमा में कुछ क्षण बिताने के बाद दोनों नेता उस पीस हाउस की तरफ बढ़ गए जहां सौहार्दपूर्ण माहौल में कई मुद्दों पर बातचीत होगी। किम जोंग उन अपने भरोसे के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल भी लेकर आए हैं।

दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात से कई उम्मीदें 

दोनों देशों के नेताओं ने गर्मजोशी और उत्साह के साथ हाथ मिलाया। किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन को कहा, ‘मैं इस ऐतिहासिक स्थान पर मिलने के लिए उत्साहित था और यह बहुत कमाल की बात है कि आप यहां सीमा रेखा तक चलकर मुझसे मिलने आए।’ मून ने भी उत्साह के साथ कहा, ‘ यह आपका बड़ा फैसला था कि इसे यहीं किया जाए।’

किम जोंग उन ने संदेश पुस्तिका में लिखा, ‘अब एक नया इतिहास शुरू होता है। शांति का युग जो इस ऐतिहासिक स्थल से शुरू होता है।’

दोनों देशों के नेताओं की इस शिखर वार्ता से दुनिया को बेहद उम्मीदें हैं। उत्तर कोरिया की समाचार एजेंसी के मुताबिक किम जोंग उन तमाम मुद्दों पर खुले दिल से बातचीत करेंगे। उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के रिश्ते बेहतर बनाने, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के अलावा उन परिवारों के बारे में भी बातचीत हो सकती है जो कोरियाई युद्ध के कारण अलग हो गए।

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