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कुलभूषण को सजा-ए-मौत : …सरबजीत कांड को दोहराना चाहता है पाकिस्तान?

मुम्बई : पाकिस्तान में कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी के बाद यहां उनके बचपन के दोस्तों ने उन्हें वापस लाने के लिए ‘कुलभूषण को वापस लाओ’ अभियान चलाया था। जाधव के एक मित्र तुलसीदास पवार ने कहा, ‘हमें पता था कि पाकिस्तान कुलभूषण का हाल भी सरबजीत जैसा ही करेगा। हम सभी दोस्त गहरे सदमे में हैं। बचपन में हमारे साथ खेलने वाला हमारा दोस्त बहुत बड़ी मुश्किल में है। वह बहुत मेहनती था और नेवी जॉइन करने पर बहुत खुश था। नेवी छोड़ने के बाद उसने दोस्तों को बताया था कि वह बिजनेस शुरू करेगा। वह बिजनेस ही कर रहा था और मुझे नहीं लगता कि उसने रॉ ज्वाइन की होगी।’





पड़ोसी देश पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा के ऐलान के बाद मुंबई में रह रहा उनका परिवार गहरे सदमे में है। जाधव को फांसी की खबर आने के बाद मीडियाकर्मी उनके परिजनों से बात करने के लिए पवई स्थित उनके अपार्टमेंट पहुंचने लगे तो परिवार वहां से किसी अज्ञात स्थान पर चला गया। ख़ास यह है कि जाधव के परिवार को भी नहीं पता था कि उस पर पाकिस्तान में मुकदमा चलाया जा रहा है।

कुलभूषण जाधव

कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)

जासूसी के आरोप में भारत के कुलभूषण को पाकिस्तान ने सुनाई मौत की सजा

अभी तक भारत सरकार ने नहीं किया सम्पर्क

जाधव परिवार के एक अन्य दोस्त ने बताया कि करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को भी घर के अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। अपार्टमेंट के बाहर सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि अभी तक सरकार की ओर से जाधव परिवार से आधिकारिक तौर पर कोई संपर्क नहीं किया गया है।

 

कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित तलब

जाधव को पाकिस्तान के अधिकारियों ने कथित तौर पर बलूचिस्तान से तीन मार्च 2016 को गिरफ्तार किया था। भारत यह कहता रहा है कि जाधव पूर्व नौ सेना अधिकारी हैं जिन्हें ईरान के नियंत्रण वाले बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था। जाधव वहां अपने बिजनेस के सिलसिले में गए हुए थे।

कुलभूषण जाधव

कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)

कुलभूषण जाधव के पास भारत का वैध पासपोर्ट तो जासूस कैसे हुआ?

गिरफ्तारी के वक्त जाधव के पास भारतीय पासपोर्ट और ईरान का वीजा भी था। हालांकि पाकिस्तान का दावा है कि जाधव को इकबालिया बयानों के आधार पर सजा सुनाई गई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यह सजा पाकिस्तान में जासूसी के लिए आने वाले अन्य लोगों के लिए सबक का काम करेगी।

जाधव की कहानी लगभग सरबजीत सिंह जैसी

28 अगस्त 1990 को शराब के नशे में सरबजीत सिंह सीमा पार गए चले गए जहां उन्हें पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार किया था। सरबजीत सिंह को रॉ का एजेंट बताते हुए उन्हें लाहौर, मुल्तान और फैसलाबाद बम धमाकों का आरोपी बनाया गया और अक्टूबर 1991 में फांसी की सजा सुनाई गई।

सरबजीत मामले में भी जाधव की तरह किया गया था फर्जीवाड़ा

सरबजीत सिंह के पक्ष में उनके परिवार के साथ साथ मानवाधिकार संगठन भी सामने आए तब पता चला कि सरबजीत के मामले में पाकिस्तान सरकार ने कई फर्जीवाड़े किए हैं। पाकिस्तान की अदालत में जो पासपोर्ट पेश किया गया था उस पर नाम लिखा था खुशी मोहम्मद का लेकिन तस्वीर सरबजीत सिंह की लगाई गई थी।

सरबजीत पर जेल में हमले की खबर के बाद भारत में उनकी सलामती के लिए दुआओं का दौर चला था और पाकिस्तान के खिलाफ भी प्रदर्शन हुए थे

इसी तरह 2005 में पाकिस्तानी ने एक वीडियो जारी करके दावा किया कि सरबजीत सिंह ने अपना जुर्म कबूल लिया है, लेकिन 2005 तक पाकिस्तान सरबजीत सिंह को मंजीत सिंह कहता था। 2005 में ही वो गवाह मीडिया के सामने आया जिसने सरबजीत की पहचान की थी, उसने मीडिया से साफ कहा कि उस पर दबाव डालकर सरबजीत के खिलाफ बयान दिलवाया गया था। लेकिन इन फर्जीवाड़े के बावजूद एक अप्रैल 2008 को सरबजीत को फांसी दिए जाने की तारीख तय कर दी गई थी, हालांकि कूटनीतिक प्रयासों के बाद उनकी फांसी अनिश्चितकाल के लिए टल गई।

जून 2012 में पाकिस्तानी मीडिया में खबर आय़ी कि सरबजीत को रिहा किया जा रहा है लेकिन यह खबर अफवाह साबित हुई। दरअसल पाकिस्तान सरकार ने सरबजीत के बदले सुरजीत सिंह की रिहाई का आदेश दिया था। तब से भारत के लोगों में यह उम्मीद जागी कि सरबजीत सिंह रिहा होकर एक दिन अवश्य वापस आएंगे लेकिन आखिर में आयी उनकी मौत की खबर। 26 अप्रैल को लाहौर के कोट लखपत जेल में उनपर जो हमला हुआ वो जानलेवा साबित हुआ।

पाकिस्तान की जेल में हुए सरबजीत सिंह की मौत की वैश्विक स्तर पर आलोचना हुई थी। सरबजीत सिंह को भारत सरकार ने शहीद का दर्जा भी दिया। सरबजीत पर फिल्म भी बनाई जा चुकी है।

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