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चीन को भारत की गुगली, मंगोलियाई राष्ट्रपति को न्योता

राष्ट्रपति-खाल्तमा-बत्तूलगा (

नई दिल्ली। भारत ने मंगोलिया के नए राष्ट्रपति खाल्तमा बत्तूलगा को भारत यात्रा के निमंत्रण दिया है। उन्होंने हाल में ही चुनाव में विजय हासिल की है। इस निमंत्रण के राजनीतिक निहितार्थ हैं, क्योंकि खाल्तमा बत्तूलगा चीन के मुखर आलोचक हैं। चीन का निकटतम पड़ोसी देश मंगोलिया अब चीन पर अपने आर्थिक आश्रय को खत्म करना चाहता है। मंगोलिया चारों ओर जमीन से घिरा देश है। उसके पास काफी प्राकृतिक संपदा है। पिछले साल तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने मंगोलिया की यात्रा की थी। उसके बाद चीन ने उसकी आर्थिक नाकाबंदी कर दी। इसके बाद मंगोलिया ने चीन को आश्वासन दिया कि भविष्य में कभी दलाई लामा को निमंत्रण नहीं दिया जाएगा। बावजूद इस आश्वासन के मंगोलिया ने भारत की ओर हाथ बढ़ाए हैं।





चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करना चाहता है मंगोलिया

मंगोलिया अब आर्थिक रूप से चीन पर अपना अवलंबन कम करना चाहता है। चीन के साथ रिश्ते बनाने के कारण वह कर्ज के बोझ से दबता जा रहा है। इस साल जनवरी से मई के बीच उसके विदेश व्यापार में से 68.5 फीसदी हिस्सा चीन का था, जबकि 1989 में केवल 1.5 व्यापार ही चीन के साथ होता था। हाल के वर्षों में भारत के साथ उसके रिश्तों में काफी सुधार हुआ है। चीन की नजरें मंगोलिया के कोयले और ताँबे के भंडारों पर रहती हैं।

वर्ष 2015 में मंगोलिया गये थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत ने मंगोलिया के साथ रिश्तों के बेहतर बनाने के लिए पहल की है। सन 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगोलिया यात्रा पर गए थे। इस महीने नए राष्ट्रपति के चुनाव के फौरन बाद भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें बधाई संदेश भेजा और भारत के राजदूत टी सुरेश बाबू उनसे भेंट करने वाले पहले राजदूत थे। राष्ट्रपति बत्तूलगा ने राजदूत के मार्फत भारत के प्रधानमंत्री के नाम संदेश भेजा कि वे देश की राजधानी उलानबाटार में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी स्थापित करें। भारत और मंगोलिया के सहयोग से एक स्कूल ऑफ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की स्थापना भी की जा रही है। भारत सरकार ने मंगोलिया को 1 अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन भी दी है।

मंगोलिया-भारत के बढ़ते रिश्तों से चीन परेशान

मंगोलिया और भारत के बीच बढ़ते रिश्तों से चीन के माथे पर बल पड़ने लगे हैं। भारत द्वारा मंगोलिया को दी गई एक अरब डॉलर की मदद को ‘घूस’ बताते हुए पिछले साल दिसंबर में चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने लिखा था, ‘नेपाल के साथ रेल-रोड संपर्क को बढ़ावा देने की कोशिशों के जवाब में भारत भी चीन के पड़ोसी मंगोलिया के साथ अपने संबंध बढ़ा रहा है। इसके लिए भारत ने मंगोलिया को एक बिलियन डॉलर की ‘घूस’ दी है।’ अखबार ने जोर देते हुए कहा है कि तिब्बत के धार्मिक गुरु दलाई लामा की उलानबाटार यात्रा का विरोध करते हुए चीन ने पड़ोसी देश मंगोलिया की सप्लाई पर रोक लगा दी थी। भारत ने इस रोक से बुरी तरह प्रभावित मंगोलिया को साल 2015 में एक बिलियन डॉलर की मदद की पेशकश की थी।इससे पहले चीनी मीडिया ने मंगोलिया को चेतावनी देते हुए कहा कि उसका भारत से मदद मांगना ‘राजनीतिक रूप से जल्दबाजी भरा कदम’ है और यह कदम द्विपक्षीय संबंधों को मुश्किल बनाएगा।

 

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