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इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के कार्य और अधिकार क्षेत्र

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस

नई दिल्ली/हेग: कुलभूषण जाधव मामले में आज इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी फांसी की सजा पर अंतिम आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। साथ ही पाकिस्तान को कई मुद्दों पर लताड़ भी लगाई। इनमें विएना संधि के तहत कुलभूषण को कोंसुलर एक्सेस मुहैया न कराए जाने से लेकर मामले को इंटरनेशनल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताने तक के मुद्दे शामिल हैं। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने स्पष्ट कहा है कि वह इस मामले में सुनवाई करने का अधिकार रखता है। आइए, हम आपको बताते हैं इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के बारे में…





कहां है ये कोर्ट

ये कोर्ट नीदरलैंड में है। इसे World Court, ICJ और The Hague भी कहा जाता है। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस, संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन का न्यायिक अंग है। इसकी स्थापना 1945 में हॉलैंड के शहर हेग में की गई थी। यह 1946 से कार्य कर रहा है।

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस

नीदरलैंड के हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस

ये कार्य है ICJ का

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि वे कानूनी विवादों का निपटारा करते हैं। इसके अलावा ये संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशेष एजेंसियों द्वारा उठाए कानूनी प्रश्नों पर राय भी देते हैं।

जजों की संख्या

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में 15 न्यायाधीश रहते हैं। इन जजों की नियुक्ति संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद मिलकर करते हैं। प्रत्येक जज का कार्यकाल नौ वर्ष का होता है। कोर्ट की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच है। जजों की चयन प्रक्रिया में एक सबसे बड़ी खास बात यह रहती है कि इसमें दो जज एक देश से नहीं हो सकते। इसके अन्तर्गत 192 देश हैं।

भारत और पाकिस्तान के जज

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भारतीय जज के तौर पर यहां दलवीर भंडारी हैं। इनका कार्यकाल 2018 तक का है। वहीं, पाकिस्तान की तरफ से अब तक सिर्फ एक जज को इसमें शामिल किया गया था। इनका नाम था मोहम्मद जफरउल्लाह खान। खान न सिर्फ इंटरनेशनल कोर्ट में जज थे बल्कि 1973 में वह यहां के प्रमुख न्यायाधीश भी रह चुके हैं।

कुलभूषण केस : पाकिस्तान ने मुंह की खाई, ICJ ने फांसी की सजा पर लगाई रोक

जस्टिस खान 1958 से 1961 के बीच इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के वाइस प्रेसिडेंट रहे और 1970 से 1973 तक प्रेसीडेंट रहे थे। ऐसे में पाकिस्तान की वह दलीलें निर्थक हैं जिसमें वह बार-बार यह कह रहा है कि इंटरनेशनल कोर्ट कुलभूषण मामले में सुनवाई करने का अधिकार नहीं रखता।

इंटरनेशनल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र

इस कोर्ट से कोई भी देश मदद ले सकता है। जैसे कुलभूषण जाधव का मामला है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ही मामले इस कोर्ट में पहुंचते हैं। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस की वेबसाइट के अनुसार इसका काम कानूनी विवादों का निपटारा करना है और अधिकृत संयुक्त राष्ट्र के अंगों और विशेष एजेंसियों द्वारा उठाए कानूनी प्रश्नों पर राय देना है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अभियोग दो तरह के होते है पहला विवादास्पद विषय और दूसरा परामर्शी विचार। अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के अनुसार यह कानूनी विवादों पर निर्णय लेता है, दो पक्षों के बीच विवाद पर फैसले सुनाता है और संयुक्त राष्ट्र की इकाइयों के अनुरोध पर राय देता है।

परामर्शी विचार

परामर्शी विचार दूसरा तरीका है किसी मुकदमे को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय तक पहुंचाना। यह निर्णय सिर्फ न्यायालय की राय पर होते हैं, पर इन विचारों के सम्मान के कारण वह बहुत प्रभावशाली होते हैं।

क्या होते हैं विवादास्पद विषय

इस तरह के मुकदमों में दोनों राज्य के लिए न्यायालय का निर्णय निभाना आवश्यक होता है। केवल राज्य ही विवादास्पद विषयों में शामिल हो सकते हैं। व्यक्ति, गैर सरकारी संस्थाएं आदि ऐसे मुकदमों के हिस्से नहीं हो सकते। ऐसे अभियोगों का निर्णय अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय द्वारा तब ही हो सकता है जब दोनों देश सहमत हों।

 

अंतर्राष्ट्रीय न्याय के स्थाई न्यायालय का अधिकार: क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने अंतर्राष्ट्रीय न्याय के स्थाई न्यायालय की जगह ली थी, जो भी मुकदमे अंतर्राष्ट्रीय न्याय के स्थाई न्यायालय के अधिकार-क्षेत्र में थे, वे सब अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार-क्षेत्र में भी हैं।

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