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IS आतंकियों ने ताबड़तोड़ दो चर्च को बनाया निशाना, 45 मरे

चर्च में धमाके

काहिरा। मिस्र के उत्तरी इलाके में दो गिरिजाघरों को निशाना बनाकर रविवार को किए गए दो धमाकों में कम से कम 45 लोगों की मौत हो गई है और सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। यह जानकारी मिस्र के अधिकारियों ने दी है। मिस्र की एक वेबसाइट की ख़बर के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी एक आत्मघाती हमलावर की डिवाइस को चर्च के भीतर विस्फोट करने से रोक रहा था तभी वह भी मारा गया। मिस्र के गृह मंत्री ने इसे आतंकवादी घटना करार दिया है। इस महीने के अंत में मिस्र का दौरा करने वाले पोप फ्रांसिस ने हमले की कड़ी निंदा की है।





राष्ट्रपति अब्दुल फ़तेह अल सीसी ने देश में तीन महीनों के लिए आपातकाल लगा दिया है। विदित हो कि सीसी ने देशभर में सेना तैनात करने का भी ऐलान किया है। तथाकथित इस्लामिक स्टेट ने ईसाइयों को निशाना बनाकर चर्च पर किए गए हमलों की ज़िम्मेदारी ली है। इस्लामिक स्टेट पहले भी मिस्र में ईसाइयों को निशाना बनाकर हमले करता रहा है।सरकार ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है।

सरकारी न्यूज वेबसाइट अल हरम के अनुसार, पहली घटना काहिरा से 58 मील दूर नील डेल्टा में टांटा शहर में अल्तार के निकट सेंट जार्ज कॉप्टिक चर्च में हुई। वहाँ सभास्थल पर फिट की गई विस्फोटक डिवाइस प्रार्थना के दौरान फटी। इसमें 29 लोगों की मौत हो गई और 71 लोग घायल हो गए। प्रार्थना स्थल खून से लाल हो गया और जहां-तहां मानव अंग छितरा गए। राष्ट्रपति अब्देल फ़तेह अल सीसी ने घटनास्थल का दौरा किया और घायलों का इलाज सैन्य अस्पताल में करने का आदेश दिया। सुरक्षा बलों ने टांटा में सिदी अब्देल रहीम मस्जिद के निकट भी दो विस्फोटक उपकरणों को निष्क्रिय कर दिया।

सेंट मार्क कॉप्टिक चर्च के बाहर हुए विस्फोट

अलेक्जेंड्रिया में सेंट मार्क कॉप्टिक चर्च के बाहर हुए विस्फोट के बाद अपनों की तलाश में परेशान हाल महिला

सरकारी मीडिया के अनुसार, इसके एक घंटे के बाद अलेक्जेंड्रिया में सेंट मार्क कॉप्टिक चर्च के बाहर हुए विस्फोट में 16 लोगों की मौत हो गई। चर्च के प्रमुख तवाड्रॉस द्वितीय को धमाके में कोई चोट नहीं पहुंची। वह घटना के समय चर्च के अंदर सामूहिक प्रार्थना में शामिल थे।

मिस्र के गृह मंत्री ने कहा कि जब एक आत्मघाती हमलावर को चर्च में प्रवेश करने से रोका गया तो उसने विस्फोट कर खुद को उड़ा लिया। इस विस्फोट में एक महिला पुलिस कर्मी समेत चार पुलिस के जवानों की भी मौत हो गई है। विस्फोटों का असर व्यापक हुआ, क्योंकि ईस्टर पर बड़ी संख्या में लोग दोनों चर्च में एकत्रित हुए थे। हमले की जिम्मेवारी तथाकथित इस्लामिक स्टेट ने ली है। मिस्र में और हमले की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि मिस्र में ख़ासकर 2013 के बाद से हमले में तब से वृद्धि हुई जब सेना ने चुनी हुई सरकार को अपदस्थ कर दिया और इस्लामिक कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू की।

हमलावरों में कुछ अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी के समर्थक भी हैं जो मुस्लिम ब्रदरहुड से ताल्लुक रखते हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि ईसाइयों ने चुनी हुई सरकार को बेदखल करने में मदद की थी। इस साल फ़रवरी महीने में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने ईसाइयों पर हमले की धमकी दी थी। मिस्र की आबादी में ईसाई करीब 10 फ़ीसदी हैं।

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