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भारत के लिए बड़ा खतरा है, चीन की नई हाईपरसोनिक मिसाइल

चाइना का हाईपरसोनिक मिसाइल

चीन के आर्मी एक्सपर्ट्स ने दावा किया है कि चीन ने नई हाईपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल DF- 17 बनाई है। ये मिसाइल अमेरिकी और भारत की रक्षा प्रणालियों को बर्बाद करने में पूरी तरह सक्षम है। साउथ चाइना के मॉर्निंग पोस्ट अखबार ने जापान की मैग्जीन डिप्लोमैट में रिपोर्ट छपने के बाद ये दावा किया है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने नवंबर 2017 में हाईपरसोनिक ग्लाइडेड व्हीकल (एचजीवी) मिसाइल के दो टेस्ट किए थे। इस मिसाइल को DF- 17 के नाम से भी जाना जाता है। यह 7,680 मील प्रति घंटे की गति तय करने में सक्षम है। राजनयिक ने बताया कि इस दौरान मिसाइलों ने करीब 1400 किमी की दूरी तय की।





चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने जवाब देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में चीनी रक्षा मंत्रालय से सवाल करना चाहिए।

क्या है हाईपरसोनिक ग्लाइडेड व्हीकल ?

रिपोर्ट के अनुसार, हाईपरसोनिक ग्लाइडेड व्हीकल रॉकेट से लॉन्च की जाती हैं। इसे आसानी से मूव किया जा सकता है। साथ ही ये पृथ्वी के क्लाइमेट को काफी तेज रफ्तार से पार कर सकती है। पारंपरिक बैलिस्टिक प्रणाली के मुकाबले एचजीवी कहीं अधिक रफ्तार से चलने में सक्षम होती है। इसे कम ऊंचाई वाले इलाके और ट्रेस ना किए जा सकने वाले क्षेत्रों में भी चलाया जा सकता है।

ये मिसाइल बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में ज्यादा तेज

बीजिंग स्थित आर्मी एक्सपर्ट झोउ चेंमिंग ने अनुसार एचजीवी टेक्नॉलोजी की दुनिया की तीन बड़ी परमाणु शक्तियों के बीच परमाणु रणनीति का हिस्सा बन गई है। अमेरिका,चीन और रूस की पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के मुकाबले में एचजीवी ज्यादा तेज है। इसे रोक पाना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, जापान और भारत को एचजीवी टेक्नॉलोजी के इस विकास के मद्देनजर चिंतिति होना चाहिए, इसलिए कि जापान में सैन्य ठिकानों के साथ भारत और अमेरिका में न्यूक्लियर रियेक्टर को टारगेट कर सकती है।

 

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