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अब चीन को याद आया ‘व्यापार’, देने लगा है शांति की दुहाई

चीन-भारत

नई दिल्ली। डोकलाम विवाद को लेकर भारत के साथ जारी तनाव के बीच चीन भले ही धमकी भरी भाषा बोल रहा हो, लेकिन उसके दिल में युद्ध नहीं, बल्कि व्यापार बसा हुआ है। जी हां, ड्रैगन युद्ध के बजाय भारत में चल रहे अपने बिजनेस के बारे में सोच रहा है। चीन के ‘ग्लोबल टाइम्स’ में प्रकाशित एक लेख में चीन ने युद्ध को नहीं, बल्कि व्यापार को प्राथमिकता देने की बात कही है।





16 देशों की व्यापार बैठक में भारत-चीन भी शामिल

बता दें कि हैदराबाद में रीजनल कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी या RCEP) के लिए 16 देशों के 100 से ज्यादा अधिकारी इकट्ठा होने वाले हैं। अगले हफ्ते होने वाली इस बैठक में भारत और चीन भी शामिल होंगे। इस बैठक में एशिया केंद्रित व्यापार सौदे पर 16 देशों के बीच बातचीत होगी। ऐसे में चीन और भारत की गिनती इस समूह के बड़े खिलाड़ियों में से हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच सीमा पर जारी तनाव को लेकर कोई बातचीत होना मुश्किल ही है। वहीँ, दोनों देशों के लिए यह चुनौती है कि व्यापार समझौते के बीच बातचीत में सीमा विवाद आड़े न आ जाए।

पहले भी व्यापार में नुकसान उठा चुका है चीन

चीनी मीडिया के मुताबिक, 2012 में चीन और जापान के बीच दियाओयू आइसलैंड को लेकर तनाव था। जापान ने इस द्वीप को नेशनलाइज करने की कोशिश की, जबकि चीन इसे अपना संप्रभु क्षेत्र बताता रहा है। दोनों देशों के बीच यह तनाव व्यापार में भी देखने को मिला था और चीन-जापान-दक्षिण कोरिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट स्थगित हो गया। 2015 में चीन और दक्षिण कोरिया ने अलग से द्विपक्षीय फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया। यानि, इस समझौते के बाद तीनों देशों की अर्थव्यवस्था को काफी फायदा मिलता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब चीन आगे भी इस तरह की स्थिति से बचना चाहेगा।यानि साफ है कि चीन नहीं चाहता कि भारत के साथ व्यापार में भी इस तरह की स्थिति पैदा हो और व्यापार में सीमा विवाद कोई बाधा बने।

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