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चीन ने फिर बढ़ाई भारत की चिंता, हिंद महासागर में बिछाया निगरानी जाल

हिंद महासागर में भारत

बीजिंग। चीन ने पानी के अंदर टारगेट पर अपनी बारीक नजर रखने के साथ अपनी पनडुब्बियों की मदद के मद्देनजर पानी के भीतर एक नया निगरानी तंत्र विकसित किया है। इसके जरिए हिंद महासागर सहित समुद्री सिल्क मार्ग पर राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जाएगी।





जानकारों का कहना है कि विवादित दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में चीन को प्रौद्योगिकी से गुप्त सूचना मिलने में मदद मिलेगी। हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में इस वक्त भारत का दबदबा कायम है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस तंत्र से पानी के भीतर की सूचना एकत्र की जाती है, जिसमें खासतौर से पानी का तापमान और खारापन संबंधी सूचना जिसका इस्तेमाल करके नौसेना को जहाज के बारे में सही जानकारी मिल सकती है। इस तरह शिपिंग में मदद मिलती है।

समुद्र में अमेरिका को चुनौती

चीनी विज्ञान अकादमी (CAS) के तहत दक्षिण चीन सागर ‘सी साइंस ऑर्गेनाइजेशन’ के नेतृत्व वाली परियोजना अभूतपूर्व सैन्य विस्तार का भाग है जिसके माध्यम से चीन समुद्र में अमेरिका को चुनौती देने की आकांक्षा रखता है।

खबरों के अनुसार, समुद्र विज्ञान संस्थान ने नवंबर में बताया था कि कई साल तक निर्माण और परीक्षण के बाद अच्छे नतीजे देने वाली नई निगरानी प्रणाली अब नौसेना के हाथ में है। जिसमें कहा गया है कि इस सिस्टम के बावजूद चीन को वास्तविक महाशक्ति से मुकाबला करने के लिए काफी कुछ करने की आवश्यकता है। चीन की यह प्रणाली प्लेटफार्म के नेटवर्क, पोत, उपग्रह और पानी के अंदर स्थित ग्लाइडर्स पर आधारित है और इसके जरिए दक्षिण चीन सागर और पश्चिम प्रशांत और हिंद महासागर से आंकड़े जुटाए जाते हैं।

90 फीसदी कारोबार का दावा

बीजिंग ऊर्जा के मामले में समृद्ध दक्षिण चीन सागर के 90 फीसदी हिस्से पर अपना दावा ठोकता है, जिससे होकर 5,000 अरब डॉलर का सालाना कारोबार होता है। इसके दावे का विरोध ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान, फिलीपींस और वियतनाम की तरफ से किया जा रहा है। चीन दूसरे बड़े जलमार्ग हिंद महासागर में भारत को चुनौती दे रहा है। बीते साल बीजिंग ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका के जिबुती में अपने विदेशी नौसेना अड्डे की स्थापना की थी।

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