International

ICJ में पाकिस्तान को झटका, नहीं देखा कुलभूषण के कबूलनामे का वीडियो

कुलभूषण जाधव

नई दिल्ली/हेग। भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में दी गई फांसी की सजा के मामले में भारत और पाकिस्तान 18 साल बाद एक बार फिर हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) में आमने-सामने हैं। केस में भारत की दलीलों को सुनने के बाद ICJ ने पाकिस्तान का पक्ष सुना। सुनवाई के दौरान ICJ ने पाकिस्तान को करारा झटका दिया। पाकिस्तानी पक्ष ने अदालत में कुलभूषण जाधव के वीडियो को दिखाने की अनुमति मांगी, जिसमें जाधव खुद के भारतीय गुप्तचर एजेंसी ‘रॉ’ एजेंट होने की बात स्वीकार रहा है। लेकिन अदालत ने पाकिस्तानी पक्ष की दलील को ठुकरा दिया। भारत के बाद पाकिस्तान की दलीलें सुनने के बाद ICJ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट खुली अदालत में अपना फैसला पढ़कर सुनाएगी।





पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि भारत की याचिका गैरजरूरी और गलत है और इस कोर्ट का इस्तेमाल भारत ने राजनीतिक थिएटर की तरह किया है। कुलभूषण के पासपोर्ट पर छपे मुस्लिम नाम का जिक्र करते हुए पाकिस्तान ने कहा कि इस मुद्दे पर भारत सफाई देने में असमर्थ रहा है। उसने कहा कि जाधव मामले में वियना संधि लागू नहीं होती। यह हमारे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है और ICJ इस पर फैसला नहीं ले सकती। पाकिस्तान ने कहा कि जाधव ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और अब भारत की अर्जी खारिज हो जानी चाहिए। उसने कोर्ट से यह भी कहा कि जाधव को फांसी देने की कोई जल्दी नहीं है। जाधव के पास अभी अपील करने के लिए 150 दिन हैं। काउंसलर एक्सेस खारिज किए जाने पर पाकिस्तान ने कहा कि जाधव इसके योग्य नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ICJ ने कहा कि कोर्ट जल्द से जल्द ओपन कोर्ट में फैसला सुनाएगा।

कुलभूषण जाधव

कुलभूषण जाधव मामले में सोमवार को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (ICJ) में सुनवाई हुई, जहां 11 सदस्यीय जजों की बेंच ने केस की सुनवाई की

 

इस पूरे मामले की सुनवाई सोमवार सुबह हेग में शुरू हुई। 11 जजों की बेंच ने सुनवाई की, जिसमें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रोनी अब्राहम थे। उन्होंने भारत और पाक की उनकी अर्जियां पढ़कर सुनाईं। दोनों पक्षों को अपनी दलीलें रखने के लिए डेढ़-डेढ़ घंटा दिया गया। भारत की तरफ से दलीलें पेश करने के लिए एडवोकेट हरीश साल्वे चार लोगों की टीम के साथ मौजूद थे। इनमें विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पाक-अफगान-ईरान) दीपक मित्तल, संयुक्त सचिव वीडी शर्मा, नीदरलैंड्स में इंडियन एम्बेसी की प्रथम सचिव काजल भट्ट और जूनियर काउंसिल चेतना एन. रॉय शामिल थे। पाकिस्तान की ओर से पाकिस्तानी टीम अटॉर्नी जनरल अश्तर औसफ वीडियो लिंक के जरिये सुनवाई में हिस्सा ले रहे हैं जबकि मुअज्जम अहमद खान (एजेंट), मोहम्मद फैसल (एजेंट) और क्यूसी ख्वार कुरेशी (कौंसिल) ने दलीलें पेश कीं।

इंटरनेशनल कोर्ट में भारत की दलीलें 

  • भारत ने अदालत में सुनवाई के दौरान कहा कि भारत की अपील के सात दिन के अंदर ही इस मामले की सुनवाई करना यह बताता है कि अंतर्राष्ट्रीय अदालत इस मामले के प्रति कितना गंभीर है। साल्वे ने कहा, “मैं भारत की ओर से यह बताना चाहता हूं कि भारत के 125 करोड़ लोग कुलभूषण जाधव की वापसी की राह देख रहे हैं।”
  • कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा गया कि कि वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि वह चाहते हैं कि बिना किसी सुनवाई के पाकिस्तान की सैन्य अदालत के फैसले पर रोक लगाई जाए। पाकिस्तान ने वियना संधि और मानवाधिकार का उल्लंघन किया है। उन्होंने कुलभूषण जाधव को किसी से भी मिलने की इजाजत तक नहीं दी। पाकिस्तान ने ना तो कुलभूषण जाधव की मदद की और ना ही कोई काउंसलर ही उपलब्ध कराया।
  • आईसीजे में भारत की ओर से इस मामले का प्रतिनिधित्व कर रहे दीपक मित्तल ने जाधव पर लगाए गए आरोपों को मनगढ़ंत और पूरे ट्रायल को हास्यास्पद करार दिया। उनका कहना था कि मानवाधिकार को दरकिनार करते हुए इस मामले में जितनी बार कांसुलर एक्सेस की मांग की पाकिस्तान ने उसे भी पूरा नहीं किया, ऐसा क्यों किया गया इसकी कोई वजह भी नहीं बताई गई।
  • गत 27 अप्रैल को भारत ने दोबारा पाकिस्तान के सामने इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन पाकिस्तान ने कोई जवाब नहीं दिया। पाकिस्तान की सैन्य अदालत पहले भी इस तरह के फैसले सुनाती रही है, और उसे सीधे अमल में ला दिया जाता है।
  • उन्होंने कहा कि विएना संधि के अनुसार यदि किसी को पकड़ा जाता है, तो अनुच्छेद 36 के अनुसार दोनों देशों में उसे राजनयिक मदद दी जाती है। भारत किसी अन्य देश की न्यायिक व्यवस्था में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है,  हम सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय नियमों की बात कर रहे हैं, जिनका पालन पाकिस्तान को करना ही पड़ेगा।
  • विएना संधि के अनुच्छेद 36 के पहले पैराग्राफ में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार के मामले में अंतर्राष्ट्रीय अदालत में चुनौती दी जा सकती है। भारत और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं और दोनों ही देश विएना संधि के नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। संधि के अनुसार कहा गया है कि कोई भी मतभेद होने पर अंतर्राष्ट्रीय अदालत इसे सुलझा सकती है।
  • बार-बार आग्रह करने पर भी इस्लामाबाद ने जाधव की ट्रायल प्रक्रिया के कोई कागजात भारत को नहीं सौंपें।
  • कुलभूषण की कॉन्सुलर एक्सेस की सारी मांगों को पाकिस्तान ने अनसुना कर दिया।
  • मानवाधिकार जिन्हें किसी मामले का मूल आधार माना जाता है पाकिस्तान ने उन्हें हवा में उड़ा दिया।
  • साल्वे ने कहा कि कुलभूषण जाधव का जो भी वीडियो दिखाया गया था, उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी। कुलभूषण जाधव पर लगाए गए आरोप काफी गंभीर हैं। वह उस पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें इसके कोई सबूत नहीं दिए गए हैं। जाधव सेना की हिरासत में था। वीडियो में उसने जो कुछ भी बोला था वह दबाव में बोला था। कोर्ट ने पहली नज़र में कहा कि यह मामला विएना संधि के उल्लंघन का है।
  • यह भी स्पष्ट है कि जाधव को कानूनी सलाह लेने से भी मना कर दिया गया। और बिना किसी न्यायिक फैसले के ही उनकी हत्या कर दिए जाने का खतरा है।
  • पाकिस्तान के कांसुलर अधिकारियों द्वारा बार बार अनुरोध के बावजूद कुलभूषण यादव से जुड़े कि आरोपपत्र अथवा सबूत या सामग्री उपलब्ध नहीं कराई।
  • इस स्थिति में भी जाधव को न तो कांसुलर मिला है और न ही कोई कानूनी प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है। बिना किसी कानूनी मदद के उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई। यह भी ज्ञात नहीं है कि जाधव पाकिस्तानी अदालत में क्षमादान की मांग करेगा या नहीं यदि एक भूतपूर्व नौसेना अधिकारी को फांसी दी जाती है तो पाकिस्तान युद्ध अपराधों का दोषी होगा।
  • कुलभूषण जाधव के माता पिता द्वारा दायर किया गया वीजा आवेदन भी अभी तक लंबित है।
  • भारत की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान ने पिछले एक साल से जाधव की सेहत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। केवल पाक मीडिया से ही इसकी जानकारी प्राप्त हुई है।

पाकिस्तान की दलीलें

  • जाधव को जल्द फांसी देने की शंका निराधार। 2008 की संधि में सुरक्षा मामलों में काउंसलर एक्सेस से इनकार कर सकता है पाकिस्तान। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने साफ किया था कि 2008 की संधि से तय होगा काउंसलर एक्सेस।
  • भारत ने नहीं बताया 2008 का समझौता जाधव मामले में क्यों लागू नहीं होता। 2008 के भारत-पाक समझौते के बाद विएना समझौते का हवाला नहीं दे सकता भारत। जासूसी के मामलों में विएना संधि के प्रावधान लागू नहीं होते।
  • जाधव को ईरान से अगवा करने के भारतीय दावे में दम नहीं। भारत ने जाधव की बेगुनाही के सबूत नहीं दिये।
  • भारत ने जाधव की नागरिकता साबित करने के लिए सबूत नहीं दिये।
  • भारत ने जाधव को काउंसलर एक्सेस पर कोई शर्त नहीं लगाई थी।
  • अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ने अटलांटिस विमान को गिराने के मामले में भी अधिकार क्षेत्र ना होने की भारतीय दलील मानी थी।
  • भारत ने दूसरे देशों के साथ संधियों से जुड़े मामलों को भी ICJ के अधिकार क्षेत्र से हटाया था।
  • 1974 में भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों को ICJ के अधिकार क्षेत्र से हटाया था।
  • भारत की अर्जी में जाधव के पास मौजूद दया याचिका के विकल्प को नजरअंदाज किया गया।
  • फोन बातचीत के सबूत बताते हैं कि जाधव भारत में अधिकारियों से संपर्क में था।
  • चार चरणों में पूरी हुई थी जाधव के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया।
  • भारत के काउंसलर एक्सेस के अनुरोध से पहले फिल्माया गया था कबूलनामे का कथित वीडियो।
  • जाधव के खिलाफ जांच में भारत ने सहयोग नहीं किया, ये 9/11 के बाद पारित यूएन के प्रस्ताव का उल्लंघन था।
  • 2008 की द्विपक्षीय संधि के मुताबिक पाकिस्तान को जाधव पर फैसले का हक। पड़ोसियों के साथ अमन चाहता है पाकिस्तान।
  • जाधव का वीडियो भी है जिसमें उसने अपने गुनाह कबूले है। जाधव की जांच में भारत सहयोग नहीं कर रहा है।
  • हम आतंकियों के सामने नहीं झुकेंगे, अपने लोगों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएंगे।

पाकिस्तानी टीम अटॉर्नी जनरल अश्तर औसफ वीडियो लिंक के जरिये सुनवाई में ले रहे हैं हिस्सा पाकिस्तानी पक्ष रखने के लिए सीनियर वकील ख्वार कुरैशी, असद रहीम खान और जोसेफ डेकी अदालत में मौजूद, कई राजनयिक भी पाकिस्तानी टीम का हिस्सा।

कौन हैं कुलभूषण जाधव

कुलभूषण जाधव पाकिस्तान द्वारा गिरफ्तार किए गए भारतीय नागरिक और पूर्व नौसेना अधिकारी हैं। पाकिस्तान का दावा है कि वह बलूचिस्तान मेु विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रहे थे और भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के कर्मचारी हैं, उन्हें तीन मार्च 2016 को ईरान के बलूचिस्तान से 14 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। 10 अप्रैल 2017 में पाक फौज की अदालत ने इन्हें जासूसी के जुर्म में मौत की सजा सुनाई है, तब से कुलभूषण जाधव सुर्खियों में हैं।

भारत ने कुलभूषण के भारतीय नागरिक और पूर्व नौसेना अधिकारी होने की पुष्टि कर दी है। जिसके अनुसार वह ईरान में अपना व्यापार करते थे उनका जन्म 1970 में महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था और 1987 में उन्होंने एनडीए ज्चाइन किया था तथा 1991 में भारतीय नौसेना में शामिल हुए।

Comments

Most Popular

To Top