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आतंकवाद को बढ़ावा दिया तो पाकिस्तान को नहीं मिलेगा फंड

डोनाल्ड ट्रंप (अमेरिका), नवाज शरीफ (पाकिस्तान)

वॉशिंगटन। आतंकवादी संगठनों को मदद देने वाला पाकिस्तान अब पूरी तरह घिरता नजर आ रहा है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने पाकिस्तान को रक्षा क्षेत्र में मदद के लिए दी जाने वाली अमेरिकी फंडिंग की शर्तों को और सख्त बनाने के लिए तीन संशोधनों पर वोट किया है। इसमें शर्त रखी गई है कि वित्तीय मदद दिए जाने से पहले पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संतोषजनक प्रगति दिखानी होगी। गौरतलब है कि अपने छह माह के कार्यकाल में ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान को कई बार आतंकवाद पर उसकी भूमिका को लेकर चेतावनी दे चुका है।





पाकिस्तान पर हो सकती है सख्त कार्रवाई 

यानि अब साफ है कि अगर पाकिस्तान ने आतंकवादियों को मदद देना बंद नहीं किया, तो न केवल उसे अमेरिका द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता राशि हाथ से गंवानी पड़ेगी, बल्कि उसे अमेरिका की सख्त कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसे लेकर पहले भी कई शीर्ष अमेरिकी अधिकारी और सांसद चिंता जताते रहे हैं। शुक्रवार को कांग्रेस की निचली सदन ने 651 अरब डॉलर वाले नेशनल डिफेंस अथॉराइजेशन ऐक्ट (NDAA) 2018 के इन तीनों विधायी संशोधनों को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सदन ने 81 के मुकाबले 344 वोटों से इसे पारित किया है।

पाकिस्तान को देने होंगे सबूत

सदन में पारित इस विधेयक के कारण अब सेक्रटरी ऑफ डिफेंस जेम्स मैटिस को पाकिस्तान को फंड देने से पहले यह प्रमाणित करना होगा कि इस्लामाबाद ग्राउंड्स लाइंस ऑफ कम्यूनिकेशन (GLOC) पर समुचित सुरक्षा बनाए रखे है। GLOC सैन्य यूनिट्स को आपूर्ति मार्ग से जोड़ने वाला और सैन्य साजो-सामान को लाने और ले जाने का अहम रास्ता है। साथ ही पाकिस्तान को यह भी साबित करना होगा कि वह अफगानिस्तान से लगी अपनी सीमा पर ‘हक्कानी नेटवर्क’ समेत बाकी सभी आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में अफगानिस्तान सरकार के साथ सक्रिय सहयोग कर रहा है या नहीं।

शकील अफरीदी को जेल से रिहा करने की उठाई मांग

सदन द्वारा पारित एक संशोधन में इस बात का प्रस्ताव रखा गया है कि जब पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों में शामिल न होने की पुष्टि नहीं कर देता तब तक अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिया जाने वाला फंड जारी न किया जाए। एक संशोधन में यह भी कहा गया है कि शकील अफरीदी एक अंतर्राष्ट्रीय नायक हैं और पाकिस्तान सरकार को चाहिए कि वह तुरंत उन्हें जेल से रिहा कर दे। अफरीदी ने एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी का पता लगाने में अमेरिका की मदद की थी।

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