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पहली मुलाकात में कैसे पिघली अमेरिका-चीन के बीच बर्फ

डोनाल्ड ट्रम्प और शी जिनपिंग

पाम बीच (फ्लोरिडा)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पहली मुलाकात के बाद दुनिया भर में यही संदेश गया है कि मतभेदों के बावजूद दोनों सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं एक दूसरे के सहयोगी हो सकती हैं।





समाचार एजेंसी रॉयटर के अनुसार, ट्रम्प ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को रोकने और बीजिंग के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा कम करने के लिए अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग पर दबाव बनाया और साथ ही चीन को लेकर अपना सुर भी बदल लिया।

अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन के बाद शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा कि कई मुद्दों पर बातें आगे बढ़ीं और चीन मतभेद कम करने के लिए मिलकर काम करने और सहयोग के लिए समान आधार तलाशने पर सहमत हुआ।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी ने कहा, “चीन और अमेरिका के संबंध प्रगाढ़ होने के हजारों कारण हैं और संबंध टूटने का कोई कारण नहीं है।” दोनों नेताओं ने आमने-सामने हुई बैठक में मतभेद के मुद्दों पर पर्दा डाल दिया और संबंध को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने कूटनीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, कानून लागू करने और साइबर सुरक्षा तथा सामाजिक क्षेत्र में वार्ता और सहयोग के लिए चार नए उच्चस्तरीय तंत्र बनाने पर सहमत हुए। हालांकि दोनों देश प्रमुख विवादास्पद मुद्दों में व्यापार और मुद्रा के मुद्दे को रचनात्मक वार्ता के जरिए हल करने को राजी हुए। दोनों देशों का समान हित बढ़ाने में है ना कि घटाने में, क्योंकि अमेरिका और चीन दोनों एक दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक सहभागी हैं। टकराव से दोनों देशों केवल हानि ही होगी।

चीन ने ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल में सहयोग करने के लिए अमेरिकी भागीदारी का स्वागत किया और सैन्य वार्ता तंत्र में विस्तार और बड़े अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर संपर्क बढ़ाने प्रस्ताव दिया। चीन के इस रुख से स्पष्ट हो गया कि बिना गठबंधन या विस्तार के चीन शांतिपूर्ण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और चीन को रोकने की कोई कोशिश दो देशों के लिए हानिकारक है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने चीन आने का शी का न्योता स्वीकार कर लिया। इससे उम्मीद बढ़ी है कि दोनों देशों के आपसी विश्वास और मजबूत होंगे।

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