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VIDEO: लीबिया के आतंकी कैंपों पर मिस्र के हवाई हमले

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काहिरा। मिस्र की राजधानी काहिरा में कॉप्टिक ईसाइयों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में सेना ने लीबिया में घुसकर ‘चरमपंथी प्रशिक्षण शिविरों’ पर हवाई हमले किए। दक्षिणी काहिरा में ईसाइयों पर यह हमला इस्लामिक स्टेट के संदिग्घ आतंकियों ने किया था, जिसमें 28 लोगों की मौत हो गई थी। मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सिसी ने कहा है कि सुरक्षाबलों ने ऐसा शुक्रवार को कॉप्टिक ईसाइयों पर हुए जानलेवा हमले के जवाब में किया है।





मिस्र के सरकारी मीडिया का कहना है कि पड़ोसी लीबिया के डेरेना में चरमपंथी प्रशिक्षण शिविरों पर 6 हमले किए गए। इससे पहले मिस्र में ईसाई श्रद्धालुओं को ले जा रही एक बस पर बंदूकधारियों ने हमला किया था। इस हमले में कम से कम 28 लोग मारे गए थे और अन्य जख्मी हुए थे।

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काहिरा में ईसाइयों पर संदिग्घ आतंकियों ने किया था हमला, जिसमें 28 जानें गईं

इस हमले के बाद मिस्र के राष्ट्रपति ने कहा कि वह चरमपंथी शिविरों को नष्ट करने में कोई कमर नहीं छोड़ेंगे, चाहे ये शिविर कहीं भी हों।

राष्ट्रपति सिसी ने शुक्रवार देर शाम टीवी के जरिए इन शिविरों पर हमले की घोषणा की थी। उन्होंने वादा किया कि लोगों की सुरक्षा हर हाल में की जाएगी। उन्होंने कहा कि बाहरी देशों से समर्थित चरमपंथ को हर हाल में नष्ट किया जाना चाहिए। सिसी ने इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी मदद मांगी।

एक समाचार एजेंसी ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया है कि लीबिया में विद्रोही ग्रुपों पर हमला किया गया। इन्हीं समूहों के लड़ाकों ने मिस्र के ईसाइयों पर जानलेवा हमला किया था। हालांकि 28 लोगों की हत्या के मामले में किसी भी समूह ने जिम्मेदारी नहीं ली है। हाल के महीनों में कथित इस्लामिक स्टेट ने मिस्र में ईसाइयों पर कई हमले किए थे।

2011 के अक्टूबर महीने में लंबे समय से लीबिया की सत्ता पर काबिज कर्नल गद्दाफी को नाटो समर्थित बलों ने अपदस्थ कर दिया था। गद्दाफी के मारे जाने के बाद से लीबिया में विद्रोही गुटों का वर्चस्व लगातार बढ़ता गया। अभी लीबिया में इन गुटों का व्यापक नियंत्रण है।

लीबिया में इस उठापटक के बीच आईएस ने भी अपनी पहुंच बना ली। इससे पहले भी मिस्र ने लीबिया में आईएस के ठिकानों पर हवाई हमला किया था। साल 2015 में मिस्र की सेना ने इनके कई ठिकानों को निशाना बनाया था।

मिस्र ने यह कदम चरमपंथियों द्वारा मिस्र के 21 ईसाइयों के सर कलम के वीडियो जारी करने के बाद उठाया था। अमेरिका इस मामले में मिस्र को मदद करने की बात दोहराई है। व्हाइट हाउस ने इस हमले के बाद कहा कि वह राष्ट्रपति सिसी और वहां की जनता के साथ खड़ा है।

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