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कोरिया युद्ध : 60 साल बाद माओ के बेटे समेत 28 सैनिकों की अस्थियां लाई गईं!

कोरिया युद्ध

कोरिया युद्ध में मारे गए चीन के अनगिनत सैनिकों में से 28 की अस्थियां दूसरी खेप में 60 साल बाद अंतत: यहाँ ले आई गईं। इनमें चीन के सर्वोच्च नेता रहे माओ त्से-तुंग के बेटे माओ एनिंग की अस्थियाँ भी हैं। अस्थियों को यहाँ सार्वजनिक स्थान पर रखा गया है। लोग सैनिकों की इन अस्थियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने ये अस्थियां चीन की वायुसेना को सौंपी, जो इन्हें स्वदेश लेकर आई। पहली खेप में 541 अस्थियाँ लाई गई थीं।





कोरियाई युद्ध

कोरियाई युद्ध में मारे गए चीन के अनगिनत सैनिकों में से 28 की अस्थियां दूसरी खेप में 60 साल बाद अंतत: चीन ले आई गईं।

सन 2013 में दक्षिण कोरिया (ROK) और चीन के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत दोनों देश के अफसरों के बीच सहमती बनी की प्रत्येक वर्ष वे दक्षिण कोरिया में पाई जाने वाली अस्थियों/अवशेषों को एक-दूसरे को सौंप देंगे। इस क्रम में 2014 से 2016 तक दक्षिण कोरिया ने चीन के 541 सैनिकों की अस्थियाँ वापस कीं। …और अब दूसरी बार में 21 मार्च को 28 सैनिकों की अस्थियाँ चीन के हवाले की गईं। ये सैनिक 1950 से 1953 के बीच कोरिया युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया (DPRK) सेनाओं के साथ लड़े थे।

माओ के बारे में

माओ त्सो-तुंग

माओ त्से-तुंग (फ़ाइल फोटो)

चेयरमैन माओ के नाम से मशहूर माओ जेदोंग या माओ त्सो-तुंग पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के संस्थापक पिता (Founder Father) कहे जाते हैं। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना की स्थापना उन्होंने 1949 में की थी और तब से लेकर अपनी मौत यानी 1976 तक वह पार्टी के चेयरमैन रहे।

माओ की चार बीवियां Luo Yixiu, Yang Kaihui, He Zizhen और Jiang Qing थीं। इनसे माओ को 10 बच्चे हुए। माओ का कोरियाई युद्ध में मारा गया बेटा माओ एनिंग (Mao Anying) माओ की दूसरी पत्नी यांग काईहुई का बेटा था। वह कोरियाई युद्ध के दौरान लड़ते हुए मारा गया था, जिसकी अस्थियाँ 21 मार्च को लाई गई थीं।

जानिए कोरियाई युद्ध के बारे में

कोरियाई युद्ध

कोरियाई युद्ध शीत युद्ध काल में लड़ा गया पहला महत्वपूर्ण युद्ध था। (फाइल फोटो)

कोरियाई युद्ध शीत युद्ध काल में लड़ा गया पहला महत्वपूर्ण युद्ध था। एक तरफ उत्तर कोरिया था जिसका समर्थन सोवियत संघ तथा साम्यवादी चीन कर रहे थे, दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया था जिसकी रक्षा अमेरिका कर रहा था। युद्ध अन्त में बिना निर्णय ही समाप्त हुआ किन्तु जन क्षति तथा तनाव बहुत बढ़ गया था।

कोरिया-विवाद सम्भवतः संयुक्त राष्ट्र संघ के शक्ति-सामर्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण था। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के विद्वान शूमा ने इसे “सामूहिक सुरक्षा परीक्षण” की संज्ञा दी है।

द्वितीय विश्वयुद्ध के अंतिम दिनों में मित्र-राष्ट्रों में क्या तय हुआ?

द्वितीय विश्वयुद्ध के अंतिम दिनों में मित्र-राष्ट्रों में यह तय हुआ कि जापानी आत्मसमर्पण के बाद सोवियत सेना उत्तर कोरिया के 38 वें अक्षांश तक तथा संयुक्त राष्ट्र संघ की सेना इस लाइन के दक्षिण भाग की निगरानी करेगी। दोनों शक्तियों ने “अन्तरिम कोरियाई प्रजातांत्रिक सरकार” की स्थापना के लिए संयुक्त आयोग की स्थापना की। किन्तु 25 जून, 1950 को उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर आक्रमण कर दिया। इसी दिन सुरक्षा परिषद में सोवियत अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए अमेरिका ने अन्य सदस्यों से उत्तर कोरिया को आक्रमणकारी घोषित करवा दिया। सुरक्षा परिषद ने यह सिफारिश की कि संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य कोरियाई गणराज्य को आवश्यक सहायता प्रदान करें जिससे वह सशस्त्र आक्रमण का मुकाबला कर सके तथा उस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित की जा सके। पहली बार 7 जुलाई, 1950 को अमेरिकी जनरल मैकार्थर की कमान में संयुक्त राष्ट्र संघ के झण्डे के नीचे संयुक्त कमान का निर्माण किया गया।

तब के सोवियत संघ के ‘वीटो’ ने खेल बदल दिया

लेकिन सोवियत संघ ने बाद में सुरक्षा परिषद की कार्रवाई में भाग लेना आरंभ कर दिया और कोरिया में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्रवाई रोकने के लिए “वीटो” का प्रयोग कर दिया। इसके परिणामस्वरूप 3 नवम्बर, 1950 को महासभा ने “शांति के लिए एकता प्रस्ताव” पास कर अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का उत्तरदायित्व स्वयं ले लिया। फलस्वरूप अमेरिकी और चीनी सेनाएँ कोरियाई मामले को लेकर उलझ पड़ी। अंततः भारत तथा कुछ अन्य शांतिप्रिय राष्ट्रों की पहल के कारण 27 जुलाई, 1953 में दोनों पक्षों के बीच युद्ध विराम-सन्धि हुई। इस प्रकार कोरिया युद्ध को संयुक्त राष्ट्र संघ रोकने में सफल हुआ। वैसे उत्तरी तथा दक्षिणी कोरिया में आपसी तनाव जारी रहा।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार वहाँ इस युद्ध के कारण 33,686 सैनिकों और 2,830 आम नागरिकों की मौत हो गई। 1 नवम्बर 1950 को चीन के युद्ध में उतरने पर सैनिकों की मौत की संख्या 8,516 बढ़ गई। दक्षिण कोरिया ने बताया कि इस लड़ाई से उसके 3,73,599 आम नागरिक और 1,37,899 सैनिक मारे गए। पश्चिम स्रोतो के अनुसार इससे चार लाख लोगों की मौत और 4,86,000 लोग घायल हुए हैं।

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