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रासायनिक हमले में सीरिया के 58 नागरिकों की मौत

सीरिया में रासायनिक हमला

इदलिब: एक बार फिर से सीरिया में रासायनिक हमले 58 लोगों की मौत हो गई है। आरोप है कि यह सब सीरिया की सेना के गैस हमले के चलते हुआ। फिलहाल सीरिया सरकार ने इसका कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। सीरिया की सेना ने सिर्फ इतना कहा है कि उसके पास न तो रासायनिक हथियार हैं और न ही वह ऐसे हथियारों का इस्तेमाल कर रही है।





सीरिया में काम कर रही मानवाधिकार संस्था के मुताबिक पश्चिमोत्तर सीरिया के खान शेखहुन शहर में 58 लोग रासायनिक हमले में मारे गए हैं। मृतकों में 11 बच्चे भी शामिल हैं। हालात पर नजर रख रहे मानवाधिकार के मुताबिक सीरिया के युद्धक विमानों ने शहर पर संदिग्ध जहरीली गैस से हमला किया। हालांकि इन आरोपों की अभी किसी अन्य पक्ष ने पुष्टि नहीं की है। द सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक शहर में काम कर रही मेडिकल टीमों ने रासायनिक हमले की जानकारी दी।

मेडिकल टीम के सदस्यों ने बताया कि ज्यादातर लोग चक्कर खाकर गिर पड़े, कुछ उल्टियां करने लगे, तो कई के मुंह से झाग निकलने लगा। स्थानीय मीडिया के माध्यम से कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं। तस्वीरों में बच्चों समेत कई लोगों के शव जमीन पर बिखरे दिखाई पड़ रहे हैं।

खान शेखहुन शहर इदलिब प्रांत में है। प्रांत का बड़ा हिस्सा अब भी अल कायदा और फतेहल अल-शम फ्रंट के पूर्व लड़ाकों के नियंत्रण में है। ये लोग खुद को सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद का विरोधी कहते हैं। इन विद्रोहियों पर सीरिया और रूस के फाइटर जेट समय समय पर हमला करते रहे हैं। अमेरिकी की अगुवाई में गठबंधन सेना भी सीरिया में इस्लामिक स्टेट के जिहादियों को निशाना बना रही है।

समझौते पर नहीं कायम है सीरिया की सरकार!

सीरिया की सरकार ने 2013 में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल न करने की संधि पर आधिकारिक रूप से दस्तखत किये थे। समझौते के कारण सीरिया पर अमेरिका ने सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं की। लेकिन उस समझौते के बाद भी सीरिया की सरकार पर बीच बीच में रासायनिक हथियार का इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में बनाए गए एक जांच दल के मुताबिक 2014 और 2015 में कम से कम तीन मौकों पर सीरिया सरकार ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया।

सीरिया सरकार इन आरोपों का खंडन करती है। उसका कहना है कि रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल वे नहीं बल्कि विद्रोही कर रहे हैं। आपको बता दें कि सीरिया में मार्च 2011 में राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ। बहुत जल्दी विद्रोह गृह युद्ध में बदल गया, जो आज भी जारी है। बीते छह साल से जारी हिंसा में अब तक 3,20,000 लोग मारे जा चुके हैं। लाखों नागरिक लेबनान, तुर्की और यूरोप में शरण ले चुके हैं। अमेरिका और पश्चिमी देश बशर अल असद को राष्ट्रपति पद से हटते हुए देखना चाहते हैं। वहीं रूस और ईरान असद का समर्थन कर रहे हैं।

रासायनिक हमले की खबर बेल्जियम की राजधानी और ब्रसेल्स में दानदाताओं के सम्मेलन से ठीक पहले आई है। 2016 में ऐसी कॉन्फ्रेंस लंदन में हुई थी, जिसमें सीरिया की मदद के लिए 11 अरब डॉलर जुटाए गए।

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