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आतंकवाद से जम्मू-कश्मीर में 27 वर्षों में 41000 मौतें, 2014 से बढ़ा आंकड़ा

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में फैले आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं और हिंसा के कारण हुई मौतों के कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 27 सालों में राज्य में 41,000 लोगों ने आतंकवाद के चलते अपनी जान गंवाई है।





आंकड़ों के अनुसार कश्मीर में प्रति वर्ष 1519 लोग मारे गए हैं। यानी हर दिन चार लोगों की मौत हुई हैं। वर्ष 1990 से 2017 के बीच के आंकड़ों पर गौर करें, तो इसमें 14,000 आम नागरिक, 5,000 सुरक्षा जवान और 22,000 आतंकी मरने वालों में शामिल हैं। यही नहीं यहां घटनाएं हुईं हैं, जो आतंकवाद से जुड़ी हैं। इनमें भी 2586 गतिविधियां सीमा पार से हुई हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 के बाद से आतंकी गतिविधियों में बढ़ोत्तरी हुई है। मार्च 2014 से इस वर्ष तक 795 आतंकी घटनाएं हुई हैं जिनमें 397 आतंकी मारे गए हैं, जबकि 178 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई। वर्ष 2014 में 222 आतंकी घटनाएं हुईं, लेकिन 2016 में इन घटनाओं की संख्या बढ़कर 332 हो गई।

खबरों के अनुसार घाटी में बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीरी युवाओं के एक वर्ग के बीच अलगाव की भावना बढ़ी है। उधर यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में कश्मीर मामले पर बोल रहे पकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्‍बासी को भारत ने करार जवाब दिया है। यूएन में भारत की प्रथम सचिव ईनम ने कहा है कि पकिस्तान आतंकियों की फैक्ट्री है और उसे दुनिया को मानवाधिकार पर ज्ञान देने की जरुरत नहीं है जबकि वह खुद अपनी जमीन पर ही मानवाधिकारों का उल्लंघन करता रहा है। यही नहीं, ईनम ने यह भी कहा कि पकिस्तान लगातार आतंकियों को पनाह देता रहा है और ‘टेररिस्तान’ बन रहा है। उन्होंने कहा  कि पकिस्तान अपने छोटे से इतिहास में आतंक का पर्याय बन गया है।

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