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महिला शक्ति : स्वदेश लौटी INSV तारिणी, मिलिए देश की 6 साहसिक बेटियों से

भारतीय महिलाएं आज घर की चहारदीवारी से बाहर निकलकर पुरुषों के वर्चस्व के क्षेत्रों में भी अपने कदम मजबूती, शिद्दत और जिम्मेदारी से रख रही हैं। जमीन, आसमान, समंदर, बर्फीली पहाड़ियों, तपते रेगिस्तान, खतरनाक जंगल अब उनसे अछूते नहीं रहे हैं। फाइटर प्लेन उड़ाना हो या कोर्ट में फैसला देना हो। पुलिस की वर्दी में अनूठे काम करने हों या जंग के मोर्चे पर या समंदर का चक्कर लगाकर नया इतिहास लिखना हो। सभी क्षेत्रों में निष्ठा, समर्पण, साहस, शौर्य, पराक्रम की स्याही से वह कामयाबी की नई इबारत लिख रही हैं। इस स्तंभ के अंतर्गत आज हम आपको  से मिलवा रहे हैं उन छह साहसी महिलाओं से जिन्होनें 7 महीनों के दौरान समद्र की यात्रा कर नारी शक्ति का एक सशक्त उदहारण प्रस्तुत किया है। आइये जानते हैं –

लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी की अगुवाई में ‘INSV तारिणी’ पर सवार ‘नाविका सागर परिक्रमा’ के अपने मिशन को पूरा कर भारतीय नौसेना का महिला दल सकुशल देश लौट चुका है जहां उनका जोर-शोर से स्वागत किया गया। ख़ास बात यह है कि केवल छह महिलाओं की इस टीम ने इस मिशन को बिना किसी पुरुष की सहायता के सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो पूरे विश्व के लिए महिला शक्ति की उम्दा मिसाल है। इस टीम में शामिल सभी छह महिलाएं आज लाखों युवतियों की प्रेरणा बन रहीं हैं ‘नाविका सागर परिक्रमा’ इस महिला टीम का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी कर रही थीं। टीम के अन्य पांच सदस्यों में लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, लेफ्टिनेंट कमांडर पी स्वाति, लेफ्टिनेंट ऐश्वर्या बोडापति, लेफ्टिनेंट एस. विजया देवी और लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता शामिल रहीं।





कई रिकॉर्ड बना चुकी हैं लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी 

लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी ऋषिकेश (उत्तराखंड) के उग्रसेन नगर की रहने वाली हैं। उनकी मां डा. अल्पना जोशी, ऋषिकेश डिग्री कॉलेज में प्रवक्ता और पिता डॉ. प्रदीप कुमार जोशी गढ़वाल केन्द्रीय विवि श्रीनगर (उत्तराखंड) में प्रोफेसर हैं। वर्तिका ने अपनी पढ़ाई श्रीनगर और ऋषिकेश से पूरी की है। उन्होंने एमिटी विवि से एरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक और आईआईटी दिल्ली से एमटेक किया।

वर्ष 2010 में वर्तिका नौसेना में अधिकारी बनी थीं। इंडियन नेवी ज्वाइन करने के बाद से वर्तिका नौसेना के साहसिक अभियानों में लगातार शामिल होती रही हैं। नौसेना में भर्ती होने के बाद वह ब्राजील के रियो डि जिनोरियो से दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन तक पांच हजार नॉटिकल मील का समुद्री अभियान तय कर चुकी हैं। वर्तिका ने अपनी जिम्मेदारी सकुशल निभा कर यह साबित किया है कि देश की बेटियां किसी से कम नहीं।

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