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आखिर क्यों खास है घुड़सवार सेना, ’61 कैवेलरी’ रेजीमेंट से जुड़ी 9 खास बातें

आधुनिक यांत्रिकरण और नई तकनीक वाली युद्ध कला से पहले शासकों की शक्ति का अंदाज़ा उनकी घुड़सवार सेना को देखकर लगाया जाता था। यहां तक कि मुगलकाल में शासकों का ओहदा उसके पास मौजूद घोड़ों की संख्या से तय होता था। बदलते दौर में भले ही युद्ध कला की तकनीक बदल गई हों लेकिन एक चीज आज भी अपने मूल अस्तित्व में है और वह है सेना की 61 कैवेलरी। इसकी खास बात है कि यह विश्व की एकमात्र गैर-यांत्रिक घुड़सवार सेना है, आइये जानते हैं क्यों खास है भारतीय सेना की 61 कैवेलरी-





घुड़सवार सेना के आधार पर तय होती थी सेना की शक्ति

26 जनवरी के मौके पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। यकीनन आप कई बार गणतंत्र दिवस पर होने वाली भव्य परेड के गवाह बने होंगे लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि इस परेड का घुड़सवार दस्ता 61 कैवेलरी इसकी अनोखी विशिष्टता है। जी हां,  आखिर क्यों खास है भारतीय सेना की 61 कैवेलरी आइये जानते हैं।

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