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सेना की नर्सिंग सेवा में पुरुष क्यों नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा

सेना के मेल नर्स

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि भारतीय थलसेना की नर्सिंग सेवा शाखा में पुरुषों को क्यों नहीं शामिल किया जा सकता। कोर्ट ने इस सेवा में केवल महिलओं को रखने की परंपराओं को पुरातनपंथी बताया। एंटिंग् चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी हरिशंकर की सदस्यता वाली पीठ ने कहा कि यह तरीका बहुत पुराने ढंग का है। खास तौर पर भारतीय थल सेना में आपकी समूची नर्सिंग ब्रांच बगैर पुरुषों के कैसे हो सकती है।





कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को भी नोटिस जारी कर एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि इंडियन मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में भर्ती में खुलेआम भेदभाव है। अपनी याचिका में इंडियन प्रोफेशन नर्सेस एसोशिएशन ने कहा है कि भारत में कई हजार प्रशिक्षित और योग्य पुरुष पेशेवर नर्स हैं। थल सेना के नर्सिंग कोर से उनका बाहर रहना अनुचित और असंवैधानिक है। ये उन्हें रोजगार के अवसर से वंचित करता है।

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