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1971 का भारत-पाक युद्ध: शेखावाटी के फौजियों को लेकर आज भी पूरे देश को नाज़ है

जयपुर। भारत का धुर विरोधी दुश्मन देश पाकिस्तान अक्सर दुस्साहस करने के ताक में रहता है और हर बार भारतीय सैनिकों ने उसे धूल चटाई। अगर बात भारत-पाकिस्तान युद्ध की आती है तो हर बार शेखावाटी के सैनिकों के अदम्य साहस की याद ताजा हो जाती है। 16 दिसंबर 1971 की भारत-पाकिस्तान की जंग में भारत की जीत के उपलक्ष्य में देशभर में विजय दिवस मनाया जाता है। हम आपको बता दें कि शेखावाटी के सैनिकों ने कैसे अपनी जान की परवाह किए बिना पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। उस समय जंग में शेखावटी का हर फौजी शेर की तरह लड़ा। जंग में जीत के बाद देशभर में शेखावाटी के फौजियों की चर्चा शुरू हो गई थी।





171 जवान वीपगति को प्राप्त हो गए थे

हर जंग में शेखावाटी के फौजियों का जोश देखने को मिलता है और यहां के हर घर में भारतीय सैनिक हैं। भारत-पाकिस्तान के युद्ध में शेखावाटी के हजारों सैनिकों ने भाग लिया। इनमें से 171 जवानों ने शहादत को गले लगाया। इस युद्ध में शहीद होने वाले फौजियों में झुंझुनूं के 107, सीकर के 48 और चूरू जिले के 12 सैनिक शामिल थे। वर्ष 1965 और 1999 के जंगों से भी ज्यादा शहीद भारत-पाकिस्तान 1971 के युद्ध में हुए थे।

भारत-पाकिस्तान 1971 की जंग में शहीद हुए सैनिकों में चूरू के तीन अल्पसंख्यक समुदाय से थे। उनमें जीडीआर मन्नू खान, जीडीआर अश्कअली खान और अलादीन खान का नाम आता है।

भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 की कुछ खास बातें

  • भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 में 13 दिनों बाद पाकिस्तान ने ढाका में सरेंडर कर दिया।
  • इसी युद्ध के बदौलत बांग्लादेश को अलग देश का दर्जा मिला।
  • भारत में 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • पूरी जंग में भारत के करीब चार हजार सैनिक शहीद हुए।
  • जंग की शुरुआत 3 दिसंबर को, जो 16 दिसंबर 1971 में बांग्लादेश का उदय होने के साथ खत्म हुआ।

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