DEFENCE

भारत के लिए अपने हथियार प्रतिबंध में ढील दे सकता है अमेरिका लेकिन ड्रोन पर संशय बरकरार

अमेरिकी ड्रोन

नई दिल्ली। अमेरिका अपने उस कानून को लेकर लचीला रुख अपनाने को लेकर गंभीर दिख रहा है जिसमें रूस से हथियार की डील करने वाले देशों पर बैन की व्यवस्था की गई है। यूएस भारत जैसे देशों के लिए इसमें छूट देने की तैयारी कर रहा है। हालांकि वाशिंगटन इसके लिए नई दिल्ली पर शर्त भी लगा रहा है और इसके अन्तर्गत भारत को रूस के साथ 40,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित एस- 400 ट्रिंफ मिसाइल सिस्टम की डील को आगे नहीं बढ़ाना होगा। इससे स्पष्ट हो जाता है कि अमेरिका चाहता है कि भारत डिफेंस डील रूस के साथ न करे।





दूसरी तरफ, भारत और रूस के बीच करीब 12 अरब डॉलर के रक्षा परियोजना पर बातचीत अभी भी जारी है। दोनों देश अमेरिका के नए कानून Counting America’s Adversaries Through Sanctions (CAATSA) से निपटने के रोडमैप पर चर्चा कर रहे हैं। जबकि अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस पहले ही कह चुके हैं कि भारत जैसे देश को CAATSA से छूट मिलनी चाहिए। भारत के सुरक्षा प्रतिष्ठान इस बात को लेकर खासे नाराज हैं कि अमेरिका ने 06 अप्रैल को रूस के 39 संस्थाओं पर पाबंदी लगा दिया था। इसमें रूस की सरकारी आर्म्स कंपनी भी है, जिससे भारत लगातार सौदा करता रहा है। CAASTA कानून के तहत इन प्रतिबंधित कंपनियों से खरीद करने वाले किसी भी तीसरी पार्टी पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

यूएस प्रशासन में इस बात को लेकर चिंता है कि रूस से एस- 400 सिस्टम की खरीद से दोनों देशों के बीच आपसी सैन्य सहयोग को झटका लग सकता है। सोमवार को हाउस आर्म्ड सर्विस कमेटी के चेयरमैन विलियम मैक ने सोमवार को कहा कि हम भारत को काफी महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानते हैं।

अमेरिका ड्रोन डील पर लगा सकता है रोक

अमेरिकी कांग्रेस के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने संकेत दिए कि उनके देश ने भारत को आर्म्ड ड्रोन MQ- 9 और अन्य उच्च तकनीक वाले उपकरण बेचने का प्रस्ताव दिया है पर, यदि एस- 400 की डील रूस के साथ होगी तो इसका सीधा असर पड़ेगा। अमेरिका की इच्छा है कि भारत कम्यूनिकेशन कम्पैटबिलिटी एंड सिक्योरिटी अरेंजमेंट (COMCASA) और BECA जैसे समझौतों पर साइन करे ताकि चीन को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके।

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