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फिर तेज हुई हथियारों की होड़, 2016 में अमेरिकी कंपनियों ने बेचे सबसे ज्यादा हथियार

नई दिल्ली। दुनियाभर में हथियार जुटाने की होड़ फिर तेज हो गई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने जो आंकड़े जारी किए हैं उन्हें देखकर तो ऐसा ही लगता है। SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में हथियारों की बिक्री में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है और ऐसा 2010 के बाद पहली बार हुआ है। वर्ष 2015 के मुकाबले 2016 में 1.9 प्रतिशत अधिक हथियार बिके। अगर तुलना वर्ष 2002 से की जाए तो यह आंकड़ा 38 फीसदी ज्यादा बैठता है।





रिपोर्ट के मुताबिक हथियार बनाने वाली 100 बड़ी कंपनियों ने वर्ष 2016 में 374.8 अरब डॉलर के हथियार और उनसे जुड़े सिस्टम बेचे। हथियार बेचने वाली कंपनियों में अमेरिका और यूरोप की कंपनियां सबसे आगे हैं। वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा हथियार अमेरिकी कंपनियों ने बनाए और बेचे। अगर आंकड़ों में बात की जाए तो अमेरिकी कंपनियों ने इस वर्ष 4 फीसदी ज्यादा हथियार बेचे। बात पैसों में की जाए तो अमेरिकी कंपनियों ने वर्ष 2016 में 217.2 अरब डॉलर के हथियार बेचे। यानी दुनियाभर में हथियारों के कारोबार में अमेरिकी कंपनियों की हिस्सेदारी 57.9 फीसदी रही। हथियार बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी लॉकहीड मार्टिन अपना नया F-35 लड़ाकू विमान ब्रिटेन, इटली और नॉर्वे जैसे देशों को बेचने में कामयाब रही। हथियार बेचने के मामले में पश्चिमी यूरोप दूसरे नंबर पर है। इसके बाद रूस का नंबर आता है। वर्ष 2016 में दुनियाभर में बिके हथियारों में रूस की हिस्सेदारी 7.1 फीसदी रही।

वैसे वर्ष 2016 में फ्रांस और इटली सरीखे देशों के हथियारों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है लेकिन जर्मनी और ब्रिटेन के हथियारों की मांग और बिक्री बढ़ी है। जानकारों का मानना है कि टैंक बनाने वाली जर्मन कंपनी क्राउस माफेई और बख्तरबंद गाड़ियां बनाने वाली राइनमेटल कंपनी के उत्पादों की मांग एशिया और यूरोप में बढ़ी है।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में चीन भी हथियारों का बड़ा निर्माता बनकर उभरा है लेकिन इस सूची में उसका कोई जिक्र नहीं है क्योंकि उसके हथियार व्यापार के विश्वसनीय आंकड़े विशेषज्ञों के पास नहीं थे।

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