Air Force

Special Report: भारत को बिना पायलट वाला लड़ाकू विमान बेचने को अमेरिका तैयार 

Gardian-Drone
प्रिडेटर गार्डियन ड्रोन विमान (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। अमेरिका भारत को ऐसा लड़ाकू विमान देने को तैयार हो गया है जो बिना पायलट के उड़ सकता है और दुश्मन के ठिकानों पर मिसाइलों से हमला कर सकता है। इस तरह का ल़ड़ाकू विमान युद्ध के मैदान में खेल का पासा पलटने वाला साबित होगा।





हथियारों से लैस किस्म वाले प्रिडेटर गार्डियन ड्रोन विमान अमेरिका की जनरल एटोमिक्स कम्पनी बनाती है। इस कम्पनी के साथ भारतीय रक्षा अधिकारी अब तक बिना हथियारों से लैस 22 टोही ड्रोन विमान 2 अरब डालर की लागत से खरीदने पर बातचीत कर रहे थे। लेकिन अमेरिकी नीति में ढील देने के बाद भारत कितने हथियारबंद ड्रोन विमान खरीदेगा इस पर भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कोई फैसला नहीं लिया है।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन और इजराइल जैसे देशों द्वारा इस तरह के विमान बेचने की होड़ में शामिल होने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने भी अपनी निर्यात नीति में ढील देने का फैसला किया है। अमेरिका अब तक मिसाइलों से लैस लड़ाकू ड्रोन जिसे प्रिडेटर ड्रोन भी कहते हैं को साथी देशों को निर्यात करने में हिचक रहा था।

सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेनाएं चाहती थीं कि उसे हथियारबंद ड्रोन विमान मुहैया कराए जाएं ताकि समुद्र और जमीन के ऊपर दुश्मन के ठिकानों को मिसाइली हमलों से ध्वस्त किया जा सके। लेकिन इस सौदे में एक बड़ी अड़चन यह है कि भारत को अमेरिकी कानून कोमकासा ( कम्युनिकेशंस कम्पैटिबिलीटी एंड सिक्युरिटी एग्रीमेंट ) पर दस्तखत करना होगा। इस कानून के विभिन्न प्रावधानों को लेकर भारत और अमेरिकी अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है और उम्मीद है कि सितम्बर में नई दिल्ली में प्रस्तावित रक्षा व विदेश मंत्रियों की प्रस्तावित वार्ता टू प्लस टू डायलाग के दौरान कोमकासा को हरी झंडी मिल जाए।

कोमकासा को लेकर भारत का बड़ा एतराज यही है कि इसकी बदौलत अमेरिकी विशेषज्ञों को भारतीय रक्षा प्रणालियों के भीतर झांकने का हक मिल जाएगा। भारत ने इससे मना किया है लेकिन अमेरिका ने अब भारत को भरोसा दिलाया है कि कोमकासा कानून केवल अमेरिका से आयातित शस्त्र प्रणालियों पर ही लागू होगा। अमेरिका यदि यह ढील दे देता है तो भारत कोमकासा पर दस्तखत कर सकेगा और इसके बाद पायलट रहित लड़ाकू विमान प्रिडेटर गार्डियन ड्रोन विमान भारतीय सेनाओं को सप्लाई किये जा सकेंगे।

भारत के साथ यदि यह हथियारों से लैस पायलट रहित विमान खरीदने का समझौता हो जाता है तो भारत यह विमान खरीदने वाला अमेरिका के नाटो साझेदारों के बाद पहला देश होगा। भारत पाकिस्तान के बीच चल रहे तनावपूर्ण सम्बन्धों के बीच इस तरह की  उच्च तकनीक वाले पायलट रहित लड़ाकू विमानों का भारतीय सेनाओं को मिलने से सैनिक संतुलन भारत के पक्ष में काफी झुक जाएगा।

गत अप्रैल में डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने अमेरिकी हथियारों का निर्यात बढ़ाने के लिये अपनी नीति में भारी ढील देने का ऐलान किया था। अमेरिका यह महसूस कर रहा था कि उसकी कड़ी निर्यात नीतियों की वजह से विश्व सैन्य बाजार से उसे नुकसान हो रहा था। दूसरी ओर चीन और इजराइल उच्च तकनीक वाले संवेदनशील हथियार प्रणालियों के निर्यात पर कोई नीतिगत अड़चन नहीं लगाते। अमेरिकी कम्पनियां भी इसके लिये भारी लाबी कर रही थी ताकि उन्हें बड़े आर्डरों से हाथ नहीं धोना पड़े। इस वजह से अमेरिका में रोजगार बढ़ाने का मौका भी छिन रहा था।

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