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SUBMARINE DAY: पनडुब्बी के भीतर महीनों धूप भी नसीब नहीं होती, मिशन पूरा कर सतह पर आते हैं नौसैनिक, 9 खास बातें

पनडुब्बी नौसेना का सबसे असरदार हथियार मानी जाती है और हो भी क्यों न, दुश्मन को भनक भी न लगे और दुश्मन के क्षेत्र में घुसकर ये उसका काम तमाम कर सकती है। यही नहीं, ये दुश्मन को तबाह कर आए और दुश्मन इसे डिटेक्ट भी न कर सके। इसी अंदाज़ में ऑपरेशन को अंजाम  देती है पनडुब्बी। मगर कभी आपने सोचा है कि पनडुब्बी के अन्दर नौसैनिकों के जिंदगी कैसी होती है?  किन मुश्किल हालातों में रह कर वे अपनी ड्यूटी को अंजाम देते है? जी हां, आप सुबह उठते ही जिस सुहानी धूप में बैठकर चाय पी रहे होते हैं। वहीं, धूप पनडुब्बी के भीतर तैनात नौसैनिकों को कई महीनों में जाकर नसीब होती है। आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर किन खतरनाक हालातों में अपनी ड्यूटी निभाते हैं सबमरीनर्स कैसे पनडुब्बी के अन्दर महीनों तक अपने मिशन को पूरा करने में जी-जान से लगे रहते हैं ये नौसैनिक।





पनडुब्बी के डुबकी लगाते ही दुनिया से टूट जाता है संपर्क

पनडुब्बी के किसी मिशन के लिए समुद्र के आगोश में समाते ही उसमें मौजूद नौसैनिकों का बाहरी दुनिया से संपर्क खत्म  हो जाता है। उनके मिशन 20 या 30 दिन के लिए होता है और कभी-कभी तो लगातार 45 दिन तक वो काम करते हैं वे जितने भी दिन मिशन पर होते हैं  ना तो वे अपने परिवार की सुध ले पाते हैं और न ही  दोस्तों की  परिवार को ये भी पता नहीं होता है कि वो कितने दिन के लिए कहां जा रहे हैं और कब वापस आएँगे उनके अभियान की जानकारी सिर्फ नौसेना के मुख्यालय को होती है

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