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शहीद जवानों के परिजनों की सहायता के लिए 15 हजार किमी की दौड़ लगा रहा यह शख्स

समीर-सिंह

फिरोजपुर। देश के लिए शहीद हुए जवानों के परिवारों की सहायता के लिए एक दिसंबर को शुरू हुई लगभग 15 हजार किलोमीटर की दौड़ के लिए लोगों में उत्साह देखते ही बनता है। दौड़ लगा रहे हैं समीर सिंह और इसे प्रायोजित किया है फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने। अटारी-वाघा बॉर्डर से 1 दिसंबर को दौड़ शुरू करने वाले समीर सिंह रविवार को फिरोजपुर पहुंचे तो लोगों ने उनका और उनके साथियों का पूरे उत्साह के साथ स्वागत किया। सोमवार को सुबह समीर सिंह और उसके साथी अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गए। गौरतलब है कि अल्ट्रा मैराथन रनर के नाम से विख्यात समीर सिंह शहीदों के परिजनों की सहायता से लिए 15,663 किलोमीटर लंबी दौड़ लगा रहे हैं। वह हर रोज 100 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। दौड़ 24 राज्यों और 7 केंद्रशासित राज्यों से होते हुए वाघा बॉर्डर पर ही समाप्त होगी। दौड़ पूरी होने में लगभग पांच महीने लगेंगे। समीर ने इस दौड़ को रन फॉर कॉज, रन फॉर हीरोज और रन फॉर भारत के वीर नाम दिया है।





समीर सिंह की यह पहली दौड़ नहीं है लेकिन इस बार यह अनूठी है। अनूठी इस मायने में कि वह देश के लिए शहीद हुए जवानों के परिजनों की सहायता के लिए दौड़ रहे हैं।

समीर सिंह भगवान कृष्ण के भक्त हैं और अपनी दौड़ने की क्षमता का श्रेय वह भगवान को देते हैं। वह कहते हैं कि सिर्फ आस्था के बल पर ही इस तरह की दौड़ लगाई जा सकती है। मंदसौर के कान्याखेड़ा गांव में किसान परिवार में जन्मे समीर सिंह ने वर्ष 2004-05 में पहली बार मैराथन में हिस्सा लिया था और उसके बाद से दौड़ना उनके जीवन का हिस्सा बन गया। उन्हें जब दुनिया की बड़ी-बड़ी दौड़ों के बारे में पता चला तो उन्होंने तय किया कि वह कुछ अनूठा करेंगे। पिछले वर्ष उनके मन में आया कि क्यों न वह हर रोज 100 किलोमीटर दौड़ें और वह भी लगातार 100 दिन। लेकिन मन में संशय भी था कि क्या वह इतना दौड़ पाएंगे?  एक दिन सपने में भगवान कृष्ण दिखाई दिये तो आस्था दृढ़ हो गई कि अब कोई भी स्थिति उन्हें दौड़ने से नहीं रोक सकती। इसी वर्ष अप्रैल में उन्होंने दौड़ना शुरू किया और 100 दिन में अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। समीर की प्रेरणा और ताकत भगवान कृष्ण हैं।

अपने अभियान की तैयारी के लिए समीर को मार्गदर्शन इस्कॉन मंदिर के अपने गुरु राधिका कन्हाई प्रभुजी से मिला। उन्होंने तैयारी करने के लिए वृंदावन जाने का सुझाव दिया। नवंबर 2016 में समीर वृंदावन चले गए। समीर अपने अभ्यास की शुरुआत वृंदावन से करते। वृंदावन की परिक्रमा 10 किलोमीटर की, फिर वहां से राधाकुंड तक 21 किलोमीटर और उसके बाद गोवर्धन की 24 किलोमीटर की परिक्रमा और उसके बाद वृंदावन तक वापस 21 किलोमीटर। कुल मिलाकर समीर हर रोज 75 किलोमीटर दौड़ने लगे। सप्ताह में दो-तीन बार दौड़ने का अभ्यास जल्द ही छह दिन में बदल गया। मार्च 2017 में वह मुंबई लौट आए और 100 दिन का अपना अभियान पूरा कर दिखाया।

अब समीर ने शहीदों और उनके परिजनों के लिए 15 हजार किलोमीटर दौड़ना शुरू किया है। उनके अभियान को समर्थन देने के लिए जगह-जगह सुरक्षा बलों के जवान भी उनके साथ दौड़ रहे हैं।

 

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