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फुरसत में : सेना के सेंसर ऑफिस में काम करता था यह यह एवरग्रीन हीरो, 4 खास बातें

हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में देव आनंद एकमात्र ऐसे अभिनेता रहे जिन्हें एवरग्रीन हीरो (सदाबहार नायक) का तमगा मिला। उनके साथ के और उनके बाद की पीढियों के नायक उम्र के दवाब में चरित्र अभिनेता बन गए लेकिन देव आनंद ताउम्र परदे पर भी और परदे से बाहर भी लोगों के जेहन में हमेशा नायक बने रहे। देव आनंद से कोई बढ़ती उम्र के बारे में बात करता तो एक ही जवाब मिलता कि बूढ़ा होने के लिए उनके पास वक्त ही नहीं है। वैसे भी किसी ने ठीक ही कहा है कि देव कभी बूढ़े नहीं होते।





आज हम आपको देव आनंद के सेना कनेक्शन के बारे में बता रहे हैं। देव आनंद फिल्मों में आने वाली उन चंद हस्तियों में से एक थे जो बेहद पढ़ी-लिखी थी। देव आनंद अंग्रेजी के अच्छे जानकार थे। 1940 के दशक में देव आनंद ने लाहौर के गवर्नमेंट कालेज से बीए आनर्स किया था। एक दिन वह ट्रेन पकड़कर बंबई पहुंच गए। कामकाज की तलाश में इधर-उधर काफी दिनों तक खाक छानने के बाद देव आनंद को सेना में नौकरी मिल गई।

सेना के सेंसर ऑफिस में की थी देव आनंद ने नौकरी

देव आनंद पढ़े-लिखे थे। इसलिए सेना के अधिकारियों ने उन्हें पढ़ने का काम सौंप दिया। काम था सेना के जवानों-अधिकारियों की चिट्ठियां पढ़ना। दरअसल उन्हें सेना के सेंसर आफिस में नौकरी मिली थी। उन दिनों युद्ध के हालात थे। सेना के जवानों और अधिकारियों की चिट्ठी सेंसर होकर ही बाहर जाती थी। देव आनंद का काम था जवानों और अधिकारियों की चिट्ठी पढ़कर यह पता लगाना कि कोई संवेदशील सूचना तो बाहर नहीं जा रही है।

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