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इन्हें कहा जाता है पुलिस की ‘तीसरी आंख’, जानें ग्राम चौकीदारों से जुड़ीं 9 खास बातें

पुराने जमाने में पुलिस तंत्र आज की तरह विकसित नहीं था। वह ऐसा दौर था जब पुलिस के नाम से लोग खौफ खाते थे। पुलिस के सबसे छोटे कर्मचारी जिन्हें ग्राम चौकीदार कहा जाता था वे रातभर ‘जागते रहो’ की आवाज लगाते थे ताकि लोग बेखौफ आराम की नींद सो सकें। आज ऐसा नहीं है कि चौकीदारी खत्म कर दी गई हो। आज भी अधिकांश गांव में चौकीदार मौजूद हैं, लेकिन अब उनके काम बदल गए हैं। कहीं ये थाने की शोभा बढ़ाते हैं तो कहीं साहब के बंगले की। ये थाने के मुखबिर की भूमिका भी निभाते हैं। देखा जाए तो अपने मुख्य कार्य से विमुख हो गई है चौकीदारी। लेकिन अब प्रशासन दोबारा से ग्राम चौकीदारी को विकसित करने में लगा है आखिर क्या है चौकीदारी प्रथा आइये जानते हैं :-





यह था चौकीदारों का काम

गांवों, मोहल्लों की गलियों में ‘जागते रहो’ की आवाज के साथ लोगों को रात के समय चौकीदारों द्वारा सजग किये जाने की परंपरा अब बीते जमाने की बात दिखाई देने लगी है। इस तरह की पहरेदारी  से जहां एक तरफ लोग सतर्क रहते थे वहीं अपराधी भी हिचकते थे। यह पहरेदारी न सिर्फ लोगों की हिफाजत के लिए थी, बल्कि चौकीदारों को समाज के हर वर्ग के लोगों के बारे में विस्तृत जानकारी होती थी। ये समाज की हर गतिविधियों पर निगरानी रखते थे तथा थाना प्रभारियों को इसकी सूचना उपलब्ध कराने का एक बेहतर जरिया हुआ करते थे।

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