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कश्मीर में पत्थरबाजों को उकसाया जा रहा है : महबूबा

सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी

श्रीनगर: कश्मीर में दो तरह के पत्थरबाज हैं पहले तो वह जो सिस्टम से नाराज हैं और दूसरे वह जो उकसावे में आकर पत्थरबाजी करते हैं। जब नई दिल्ली में आज जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बता रही थीं उसी वक्त श्रीनगर में विद्यार्थियों द्वारा किए गए पथराव में एसएसपी घायल हो गए। एसएसपी श्रीनगर को अस्पताल लाया गया है। प्रशासन द्वारा सोमवार को स्कूल खोले जाने के निर्णय के बाद श्रीनगर के कोठी बाग में स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों ने सरकार व देश विरोधी नारेबाजी करते हुए सुरक्षाबलों पर पथराव करना शुरू कर दिया। इसी दौरान एसएसपी श्रीनगर इम्तियाज इस्माइल परे पत्थर लगने से घायल हो गए। उल्लेखनीय है कि पिछले कई दिनों से कश्मीर घाटी में हिंसा के चलते स्कूलों को कालेजों को बंद रखा गया है।





कश्मीर हिंसा : सुरक्षाबलों को संयम बरतने का निर्देश

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार कश्मीर में राष्ट्र विरोधी तत्वों पर सख़्ती के मूड में है। साथ ही केंद्र सरकार कश्मीर के मुद्दे पर अलगाववादियों और पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं चाहती जबकि महबूबा मुफ़्ती कश्मीर का संकट दूर करने के लिए बातचीत का दरवाज़ा खोलना चाहती हैं।

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की

बातचीत करने के पक्ष में महबूबा मुफ्ती

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर में बातचीत शुरू करने का समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि जहां तक वाजपेयी जी ने कोशिश की थी उसके आगे बढ़ना चाहिए और इसके लिए आगे माहौल बनाना होगा। पत्थरबाजों को उकसाया जा रहा है। ऐसे में पत्थरबाजी और गोली के बीच बातचीत नहीं हो सकती।

श्रीनगर में 25 अप्रैल को एकीकृत कमान की बैठक

जम्मू। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती मंगलवार यानी 25 अप्रैल को श्रीनगर में एकीकृत कमान की बैठक की अध्यक्षता करेंगी। उत्तरी कमान के जीओसी-ईन-सी, 16 कोर के जीओसी, 15 कोर के जीओसी, जम्मू व कश्मीर के डीजीपी, आईजी बीएसएफ, आईजी सीआरपीएफ, आईबी और रॉ के वरिष्ठ अधिकारी और उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह इस बैठक में भाग लेंगे। सूत्रों के अनुसार, बैठक में सुरक्षा से संबंधित मुद्दों के अलावा हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रकाश में आए हिंसक वीडियो के बारे में भी विचार-विमर्श किए जाने की संभावना है।

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पत्थरबाजी की वारदात में आई कमी

आतंकवाद और अलगाववाद की पीड़ा झेल रहे कश्मीर घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवा को बंद किए जाने से सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी की वारदातों में नाटकीय रूप से कमी आई है। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक-घाटी में ऐसे करीब 300 व्हाट्सऐप ग्रुप एक्टिव थे और हर ग्रुप में करीब 250 लोग थे, जिन्हें सुरक्षाबलों के ऑपरेशन की जानकारी दी जाती थी। इसके जरिए उन्हें मुठभेड़ स्थल पर बुलाया जाता था।

अधिकारी ने बताया कि अब इसमें से 90 फीसदी ग्रुप अब बंद हो चुके हैं। इनमें से कुछ ग्रुप एडमिन की पहचान कर ली गई है और उन्हें बातचीत के लिए बुलाया गया। उनकी काउंसलिंग की गई, जिसके बड़े अच्छे नतीजे निकले। अधिकारी के मुताबिक- इंटरनेट सेवा पर रोक और काउंसलिंग के बाद पत्थरबाजों की संख्या में काफ़ी कमी आई है हालांकि, इंटरनेट बंद होने की वजह से लोगों के कारोबार पर भी बुरा असर पड़ा है।

पाकिस्तान कश्मीर में पत्थरबाजों को उकसाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेता है

दरअसल, घाटी में आतंकियों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन में बाधा डालने और सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी के लिए युवाओं को व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए उकसाया जाता था। जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद और सेना ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान कश्मीर में पत्थरबाजों को उकसाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेता है।

घाटी में जहर घोलने के लिए पाकिस्तान ले रहा है सोशल मीडिया का सहारा!

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