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करगिल युद्ध में पैदल सेना ने लिखी विजयगाथा, पैदल सेना से जुड़े 7 बड़े ऑपरेशन

भारत के खिलाफ दुश्मन ने जब भी अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की हिमाकत की तब भारतीय थल सेना की पैदल सैन्य टुकड़ियों ने न केवल उन्हें नाकाम किया बल्कि अपनी ताक़त, बहादुरी और पराक्रम का ऐसा परिचय दिया है जो पूरे विश्व के लिए उदाहरण बन गया। भारत ही नहीं बल्कि हर देश की सेना में इन्फेंट्री की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि इन्फेंट्री के बिना किसी भी देश के लिए युद्ध के मैदान में दुश्मन से जीतना लगभग असंभव ही है। आज हम आपको भारतीय सेना की इन्फेंट्री के कुछ ऐसे ही ऑपरेशंस के बारे में बता रहे जिनमें पैदल सेना ने दुश्मन को मुहंतोड़ जवाब दिया।





करगिल युद्ध 1999 ऑपरेशन विजय

वर्ष 1998 की सर्दियों में पाकिस्तान के घुसपैठियों ने करगिल की पहाड़ियों पर कब्जा जमा लिया। वर्ष 1999 की गर्मियों की शुरुआत में इस कब्जे की बात पता चली। अपनी जमीन से दुश्मन को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया। दुश्मन ऊंचाई पर बैठा था। एक तरह से वह फायदे की स्थित में था। इन विपरीत हालातों में भारतीय सेना के जवानों ने गजब का पराक्रम दिखाया। दुश्मन को खदेड़ने के लिए उन चोटियों तक भारतीय जवानों का पहुंचना जरूरी था। कैप्टन मनोज कुमार पांडे, कैप्टन विक्रम बत्रा, राइफलमैन संजय कुमार और ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव सरीखे सैकड़ों जवानों के असाधारण पराक्रम ने घुसपैठियों को मार भगाया। करगिल युद्ध में युवा अधिकारियों ने शानदार और अनुकरणीय प्रदर्शन करते हुए एक सुनहरी विजयगाथा लिखी जो इन्फेंट्री के दम पर ही संभव हुई।

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