DEFENCE

वो आंदोलन जिसने अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिला दीं, 7 खास बातें

कांग्रेसी नेता हुए थे गिरफ्तार
फोटो (सौजन्य- गूगल)

भारत में अंग्रेजी शासन की जड़ें हिला देने वाले ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की आज वर्षगांठ है। आज से 76 वर्ष पहले 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के नेतृत्व में देशवासियों ने आजादी के लिए ऐसी हुंकार भरी कि अंग्रेजों के हाथ-पैर फूल गये। पहली बार अंग्रेजों को महसूस हुआ कि यह कोई सामान्य आंदोलन नहीं है। इसलिए उन्होंने आंदोलन के शुरू होते ही अंग्रेजों ने अपना दमन चक्र तेज कर दिया लेकिन गांधी जी के आह्वान ‘करो या मरो’ पर अमल करने के लिए सभी देशवासी एकजुट हो गये। हर भारतवासी के लब पर एक ही बात थी ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’। आज हम आपको बता रहे हैं इसी आंदोलन जिसे ‘अगस्त क्रांति’ भी कहते हैं से जुड़ी कुछ रोचक बातें :





हर दिशा से एक ही आवाज, ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’

भारत छोड़ो आंदोलन

यह वह दौर था जब दूसरा विश्वयुद्ध चल रहा था। अंग्रेजों ने भारत को अपनी मर्जी से युद्ध में शामिल कर लिया। मार्च 1942 में सर स्टेफोर्ड क्रिप्स को भारत भेजा गया। क्रिप्स ने विश्वयुद्ध के बाद भारत को आजाद देश का दर्जा देने की बात कही लेकिन ड्राफ्ट में बहुत सी कमियां थीं। कांग्रेस ने इसे नकार दिया औऱ आंदोलन की रूपरेखा में जुट गई। 8 अगस्त 1942 को बंबई (अब मुंबई) के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस महासमिति ने ‘भारत छोड़ो’ नाम से प्रस्ताव पारित किया। ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ नारे ने समस्त देशवासियों को एकजुट कर दिया और अगले ही दिन यानी 9 अगस्त 1942 को देशवासी सड़कों पर उतर आए। हर दिशा से एक ही आवाज आ रही थी ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’।

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