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अँधेरे में आपरेशन करें तो कैसे? नाइट विजन डिवाइस की बैटरी भी फुस्स

नई दिल्ली: रात को घने अंधेरे में दुश्मन को सही तरीके से न खोज पाने की क्षमता में कमी भारतीय सेना के लिए अब भी चुनौती बनी हुई है। खासतौर से कश्मीर में, जहां घुसपैठियों की हरकत रात को होती है, सेना के लिए काम करना ज्यादा दुश्वार है। वजह ये है कि अंधेरे में किसी भी जीव की मौजूदगी को खोजने वाली डिवाइस की तादाद कम है और जितनी हैं भी उनसे भी सही तरह से काम नहीं लिया जा पा रहा।





सेना की अंदरूनी रिपोर्ट के हवाले से छपी खबरों के मुताबिक रात को सैनिकों की आवाजाही पर इसलिए असर पड़ रहा है क्योंकि उनके पास जो हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर्स (HHTI) है उनकी बैटरियां बेहद कमजोर हो चुकी हैं। ऐसी बैटरी 3-4 घंटे काम करनी चाहिए लेकिन आधा घंटा भी नहीं चलती। ऐसे में सैनिकों को अपने साथ ज्यादा बैटरियां लेकर जाना पड़ता है। सो इनके पास पहले से भारी भरकम सामान में इजाफा हो जाता है।

ये हालात आपरेशंस के दौरान उनके लिए मुश्किलें ही नहीं पैदा करते बल्कि उनकी जान के लिए खतरा भी बढ़ा देते हैं। सैनिकों को ये मुश्किल पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा (Loc) में ही पेश नहीं आ रही, पूर्वोत्तर में भी आ रही है जहां उन्हें घने अंधेरे के बीच घने जंगलों में खोजबीन या गश्त करनी होती है। दरअसल, हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर्स एक ऐसी प्रणाली है जिसके जरिए किसी भी जीव यानि इंसान हो या जानवर और वाहन का अंधेर में पता लग जाता है। लेकिन ये डिवाइस बैटरी से चलती है जिसका अच्छा खासा वजन होता है।

नाइट विजन डिवाइस के अलावा सेना के लिए ऐसी कई और दिक्कतें हैं जिनका जिक्र इस रिपोर्ट में किया गया है। असल में मौसम की मार इन दिक्कतों को और बढ़ा रही है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 1990 से अब तक आतंकवाद से निबटने के दौरान 9 हजार भारतीय सैनिक जान गंवा चुके हैं और आतंकवादियों के खिलाफ ज्यादातर आपरेशन रात को ही होते हैं।

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