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अर्धसैनिक बलों को ‘संगठित सेवाओं’ की तरह लाभ मिले

अर्धसैनिक बल

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल जैसे अर्धसैनिक बलों को ‘संगठित सेवाओं’ की तरह ही आर्थिक लाभ देने के सवाल पर फिर से विचार करे। कोर्ट ने केन्द्र को इस मामले पर विचार के लिए 12 हफ्ते का वक्त दिया है।





दरअसल, सितंबर 2015 में दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला दिया था कि अर्धसैनिक बलों को संगठित सेवा मानने पर विचार किया जाए ताकि उनके कार्मिकों को वित्तीय लाभ मिले। केन्द्र सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

6 अप्रैल को न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि वह समझती है कि अर्धसैनिक बलों की शिकायत ‘समान काम के लिए समान वेतन’ का लाभ नहीं दिए जाने के कारण है। यह लाभ संगठित सेवाओं को दिया जाता है और यह आर्थिक लाभ उन्हें देकर उनकी शिकायत का समाधान किया जा सकता है। सरकार इस बारे में पुनर्विचार करे।

सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), और सशस्त्र सीमा बल (SSB) को अपनी ड्यूटी के दौरान अपनी भूमिका निभानी पड़ती है। इसके लिए कोर्ट ने केन्द्र सरकार को 12 हफ्ते का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी। अदालत ने ये भी कहा कि केंद्र कोई भी फैसला नहीं कर पाता तो वह खुद दोनों सेवाओं से जुड़े लोगों के ड्यूटी चार्ट और कार्यस्थल की विवेचना करेंगे।

अभी अर्धसैनिक बलों में उच्च पदों पर आईपीएस अधिकारियों की तैनाती है। इसलिए अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों के लिए तरक्की की गुंजाइश कम हो जाती है। अदालत का कहना था कि अगर किसी वरिष्ठता के आधार पर यदि एक अधिकारी को उच्च पद मिलता है और वैसे और पद रिक्त नहीं है तो उसके समकक्ष अधिकारियों को उतने वित्तीय लाभ मिलने चाहिए।

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि अर्धसैनिक बलों (केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल) को संगठित सेवा माना जाएगा तो आईपीएस अधिकारियों की तैनाती नहीं हो पाएगी।

 

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