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समर नीति: ईरान और रूस पर आर्थिक प्रतिबंध से भारत पर भी असर

अमेरिका ने ईरान और रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं लेकिन इसका दुष्प्रभाव भारत पर पड़ेगा।  पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस में जो प्रतिबंध कानून पारित हुआ है उसे कैटसा यानी काउंटरिंग अमेरिकन एडर्वर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट कहते हैं। यानी अमेरिका के प्रतिद्वंदी देशों पर दबाव बनाने का प्रतिबंध  कानून।





दूसरी ओर ईरान के साथ छह देशों के परमाणु समझौते से अलग हो कर ईरान पर अमेरिका ने प्रतिबंध बहाली का फैसला किया है। इन प्रतिबंधों का मतलब यह है कि रूस और ईरान के साथ जो भी संस्था  या कम्पनी व्यापारिक लेनदेन करेगी उसके साथ अमेरिका किसी तरह का लेनदेन या कारोबार नहीं करेगा। या उन कम्पनियों को अपने यहां किसी तरह का कारोबार नहीं करने देगा। ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध का सबसे पहला असर तो खुद अमेरिका पर ही हुआ है जिसकी बोईंग कम्पनी को ईरान के 20 अरब डालर सौदे से हाथ धोना पड़ेगा।

इसके साथ कैटसा का सबसे पहला असर भारत पर यह हुआ है कि रूस से जिन हथियार प्रणालियों का सौदा करने पर बातचीत चल रही थी उस पर विराम लग गया है जिसमें एंटी मिसाइल प्रणाली एस-400 शामिल है। यहां तक कि रूसी हथियार कम्पनियों को भारतीय बैंकों से अमेरिकी डालर में जो भुगतान किया जाता था उन पर भी सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि बैंकों को डर है कि रूस के साथ किसी तरह का लेनदेन किया तो अमेरिका इन बैंकों को अपनी धरती पर काम नहीं करने देगा।

ईरान पर अमेरिकी प्रतिंबध लगने का तत्काल असर यह हुआ है कि पेट्रोलियम के भाव चढ़ गए हैं जिससे भारत का आयात बिल काफी बढ़ जाएगा। भारत विदेशों से तेल आयात पर 90 प्रतिशत से अधिक निर्भर है इसलिये स्वाभाविक है कि बढ़ी हुई तेल कीमतों का असर भारत के आम लोगों पर पड़ेगा। तेल के अलावा ईरान के चाबाहार बंदरगाह विकास प्रोजेक्ट में भारत सक्रिय हिस्सेदारी कर रहा है। भारत की चिंता है कि इस बंदरगाह प्रोजेक्ट पर काम कैसे जारी रखा जाए। इसी बंदरगाह के जरिये भारत न केवल अफगानिस्तान तक अपना माल पहुंचा सकता है बल्कि मध्य एशिया के देशों तक भी भारत अपना निर्यात बढ़ाने की क्षमता रखता है।

साफ है कि अमेरिका द्वारा ईरान और रूस को तंग करने के इरादे से लाए गए प्रतिबंधात्मक कदम का असर न केवल भारत बल्कि आम भारतीय नागरिक पर भी पड़ेगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के इरादे से ईरान के खिलाफ आर्थिक बहिष्कार के मद्देनजर भारत ने पिछले सालों में ईरान के बंदरगाह पर अपना काम काफी सीमित कर लिया था। लेकिन अब जबकि चाबाहार पर दोनों भारतीय बर्थ का काम पूरा हो चुका है भारत से अमेरिका अपेक्षा करेगा कि भारत चाबाहार से दूर हो जाए।

रूस पर कैटसा का असर भारत की रक्षा तैयारी पर पड़ सकता है। ईरान और रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों की दुहरी मार भारत पर पड़ने जा रही है जो भारत के सामरिक और आर्थिक हितों पर भारी चोट करने जा रहा है। ऐसा तब हो रहा है जब अमेरिका चीन से मुकाबले के लिए भारत के साथ सामरिक साझेदारी को मजबूत करने की बात कर रहा है ताकि वह एशिया प्रशांत इलाके में चीन के दबदबे को बेअसर कर सके। अमेरिका यह भी चाहता है कि वह हिंद प्रशांत इलाके में भारत, जापान और आस्ट्रेलिया को साथ ले कर चीन के मुकाबले के लिये तैयार हो। इसके लिये एक चतुर्पक्षीय गुट बनाने की पहल हो चुकी है। लेकिन अमेरिका अपने ही हाथों इन प्रयासों को बेअसर कर रहा है। साफ है कि रूस और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध आत्मघाती साबित होंगे।

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