Air Force

स्पेशल रिपोर्ट: समुद्र पर उतरने वाले जापानी विमान पर बात जारी

यूएस-2 एम्फीबियस एयरक्राफ्ट
यूएस-2 एम्फीबियस एयरक्राफ्ट (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। जमीन और समुद्र पर उतरने की क्षमता रखने वाले यूएस-2 एम्फीबियस एयरक्राफ्ट को लेकर भारत और जापान के बीच बातचीत ठप नहीं हुई है। जापान के रक्षा मंत्री और भारतीय रक्षा मंत्री की यहां हुई दिवपक्षीय बातचीत के बाद जारी एक बयान में इस आशय के संकेत दिये गए हैं।





गौरतलब है कि जापान ने भारत को  समुद्र की सतह पर उतरने वाले इस सैन्य  विमान को भारत को सप्लाई करने की पेशकश कुछ साल पहले की थी लेकिन यह सौदा अब तक सम्पन्न नहीं हो सका है। इस आशय की अटकलें थी कि जापान का यह विमान काफी खर्चीला होने की वजह से भारतीय सेनाओं के लिये नहीं खरीदा जा रहा है। इस बात की भी अटकलें थी कि जापान इस विमान को भारत में बनाने में मदद करे और इसकी तकनीक भारत को बताए। लेकिन इस बारे में कोई अंतिम फैसला सरकार ने अब तक नहीं बताया है।  दोनों रक्षा मंत्रियों  ने कहा कि यूएस-2 विमान के बारे में सहयोग पर अब तक हुई  प्रगति के बारे में दोनों पक्षों ने नोट किया है।

जापान भारत को यह विमान भारत के साथ हुए रक्षा सहयोग समझौते के तहत सप्लाई करने को तैयार था। जापानी रक्षा मंत्री इत्सुनोरी इनोदोरा ने 19 और 20 अगस्त को भारतीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ आपसी रक्षा और सामरिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर गहन बातचीत की और एक साझा बयान जारी कर भारत औऱ जापान के बीच रक्षा सहयोग औऱ गहरा करने का संकल्प लिया।

दोनों रक्षा मंत्रियों ने कहा कि हिंद प्रशांत इलाके में शांति व समृदिध के लिये जरूरी है कि हिंद महासागर और प्रशांत सागर में शांति व स्थिरता बनी रहे। दोनों रक्षा मंत्रियों ने हिंद प्रशांत इलाके में शांति व सुरक्षा के मसले पर दो टूक बातचीत की। दोनों मंत्रियों ने कहा कि समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना दोनों के साझा हित में है । इस नजरिये से जापान और भारत की नौसेनाओं के बीच हुई सहमति का दोनों रक्षा मंत्रियों ने स्वागत किया। इस समझौते में सहमति बनी है कि जापान मेरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स और भारतीय नौसेना के बीच गहरा सहयोग करेंगे जो अब लागू हो रही है। दोनों मंत्रियों ने इस बात पर संतोष जाहिर किया कि दोनों देशों की तीनों सेनाओं के बीच विभिन्न स्तर पर  आदान प्रदान और सहयोग चल रहा है।

उच्च तकनीक वाले जापानी रक्षा उत्पादों के भारत में उत्पादन के लिये सहयोग के इरादे से दोनों पक्षों ने एक संयुक्त कार्यदल का गठन किया है । इसकी पिछली बैठक नई दिल्ली में जुलाई में हुई थी।  इसमें हुई प्रगति पर दोनों पक्षों ने संतोष जाहिर किया।  इस इरादे से जापानी रक्षा कम्पनियों ने भारत का हाल में दौरा किया है। भारतीय पक्ष ने जापानी रक्षा दल को तमिल नाडु और उत्तर प्रदेश में बनाए जा रहे रक्षा गलियारे के बारे में भी बताया और जापानी रक्षा उद्योग को इसमें निवेश करने को कहा।

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