Air Force

स्पेशल रिपोर्टः ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस सुखोई-30 को हिंद महासागर पर उड़ाया

नई दिल्ली। थलसेना और नौसेना के तालमेल से वायुसेना का अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास गगनशक्ति अब अपने दूसरे चरण में पहुंच गया है। इसके तहत हिंद महासागर के ऊपर प्रभुत्व स्थापित करने का अभ्यास पहली बार ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने नौसेना के तालमेल से किया। पिछले एक सप्ताह से देश के सीमांत इलाकों पर चल रहे गगनशक्ति युद्धाभ्यास के तहत वायुसेना ने अपने 11 सौ से अधिक लड़ाकू और परिवहन विमानों के अलावा सभी हेलीकॉप्टरों को युद्धअभियान में झोंक दिया है।





गगनशक्ति के दूसरे चरण के तहत वायुसेना के लड़ाकू विमानों सुखोई-30 और जगुआर ने हिंद महासागार के तटीय इलाकों के साथ बीच महासागर में उड़ान भर कर दुश्मन की सेना पर हावी होने का अभ्यास किया। 11 अप्रैल से शुरू हुआ गगनशक्ति अभ्यास 22 अप्रैल तक चलेगा। इसके तहत पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर वायुसेना की हमलावर और रक्षात्मक रणनीति और ताकत का परीक्षण किया जा रहा है। पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर चल रही सैन्य तनातनी के मद्देनजर भारतीय वायुसेना ने अपनी हमलावर ताकत को परखने का यह ताजा अभ्यास किया है।

यहां वायुसेना के प्रवक्ता ने बताया कि गगनशक्ति के दोनों चरणों में वायुसेना की समुद्री युद्ध क्षमता की अवधारणाओं का परीक्षण किया गया है। लेकिन खासकर समुद्री इलाके में नौसेना को किस तरह रणनीतिक मदद दी जाए इसका परीक्षण किया गया। इस दौरान हिंद महासागर के ऊपर सुखोई-30 और जगुआर लड़ाकू विमानों में उड़ान के दौरान ही ईंधन भरने का अभ्यास किया गया। इस दौरान पूर्वी और पश्चिमी समुद्र तटों पर वायुसेना के संसाधनों को तैनात कर उनकी युद्ध लड़ने की क्षमता को परखा गया।

नौसेना के समुद्र टोही विमान पी-8-आई के तालमेल से समुद्र के ऊपर सुखोई-30 विमानों को उड़ाया गया। ये उड़ानें अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तक की गईं। इस दौरान सुखोई -30 विमानों में सुपरसोनिक ब्रह्मोस और हारपून युद्धपोत नाशक मिसाइलों को भी तैनात किया गया था।

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