Air Force

विशेष रिपोर्टः सुखोई-30 एमकेआई के वायुसेना में 21 साल पूरे

सुखोई- 30

नई दिल्ली। रूस द्वारा भारतीय वायुसेना को सप्लाई किये गए अत्याधुनिक लड़ाकू विमान सुखोई-30-एमकेआई ने अपनी पहली उड़ान 21 साल पहले एक जुलाई को भरी थी और अब तक ऐसे 249 विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जा चुका है।





पहले इन विमानों का रूस से आयात किया गया फिर इनका रूस की मदद से हिंदुस्तान एऱोनाटिक्स लि. द्वारा भारत में उत्पादन किया जाने लगा। एक सुखोई-30एमकेआई विमान की अनुमानित कीमत 5.3 करोड़ डालर( करीब 365 करोड़ रुपये) पड़ती है। यह दुनिया का ऐसा पहला विमान है जो फेज्ड एरे रेडार से लैस है।

एक जुलाई, 1997 को रूसी टेस्ट पायलट ब्लादीमिर अवेरेयानोव ने सुखोई-30 की भारतीय किस्म एमकेआई पर पहली उड़ान 50 मिनट तक भरी थी। इस विमान की निर्माता कम्पनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कारपोरेशन है। इस कम्पनी ने एक ट्वीट कर यह बताया कि सुखोई-30 एमकेआई की सेवा के 21 साल हो चुके हैं। इस विमान का विकास रूसी कम्पनी सुखोई जेएससी ने किया था। भारत की वैमानिकी कम्पनी हिंदुस्तान एरोनाटिक्स कम्पनी इसका लाइसेंस उत्पादन कर रही है। इस साल मई तक सुखोई-30 एमकेआई के 249 विमानों का उत्पादन हो चुका है। यह विमान भारतीय वायुसेना की हमलावर रणनीति की  मुख्य रीढ़ माना जाता है।

हिंदुस्तान एरोनाटिक्स के कोरापुट डिवीजन ने इस विमान के 920 एएल-31 एफपी टर्बोफैन बनाए हैं जब कि इसका मुख्य ढांचा और सहायक कलपुर्जे HAL के लखनऊ औऱ हैदराबाद डिवीजनों में बनाए जा रहे हैं। इस विमान की एसेम्बली HAL के नासिक डिवीजन में औऱ यहीं इसकी परीक्षण उड़ान होती है। सुखोई विमान के स्वदेशीकरण कार्यक्रम को चार फेजों में सम्पन्न किया गया। वर्ष 2013 से नवीनतम चौथे फेज में पूरा विमान भारत में ही बनता है।

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