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स्पेशल रिपोर्ट: केरल से मस्कट के प्राचीन समुद्री व्यापार मार्ग पर निकले पोत

एडमिरल सुनील लांबा

नई दिल्ली।  केरल के मालाबार समुद्र तट और फारस की खाड़ी के बीच प्राचीन समुद्री व्यापार मार्ग की राह पर हिंद महासागर के तटीय देशों के  एक टाल शिप- सेल टुगेदर अभियान  को भारत और ईऱान के नौसेना प्रमुखों ने कोच्चि से मस्कट के लिये ध्वज दिखाकर  14  नवम्बर को  रवाना  किया।





यह अभियान इंडियन ओसन नेवल सिम्पोजियम (आयंस ) की दसवीं सालगिरह के मौके पर रवाना किया गया। आयंस के  सदस्य देशों के आला नौसैनिक कमांडरों ने इस मौके पर आयोजित सम्मेलन में भाग लिया। केरल से  निकला यह अभियान  29  नवम्बर को मस्कट पहुंचेगा।

1,200  किलोमीटर की दूरी तय करने वाले इस समुद्री अभियान में श्रीलंका, चीन, ब्रिटेन , ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश औऱ मालदीव के एक-एक सैनिक सवार हुए हैं। इस समुद्री अभियान में ओमन की नौसेना के पोत जिनत- अल- बिहार और भारतीय नौसेना के पोत तरंगिनी और सुदर्शिनी को एक साथ रवाना किया गया है। इन पोतों को भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ईरान के नौसेना कमांडर रियर एडमिरल हुसैन खानजादी ने संयुक्त तौर पर  रवाना किया ।

Indian-Ship

इन पोतों के साथ भारतीय नौसेना के छोटे पोत जैसे म्हादेई भी साथ जा रहे हैं। यह पोत सेशल्स की ओर जाएगा। इस मौके पर एक आकर्षक फ्लाई पास्ट आयोजित हुआ जिसमें नौ हेलीकाप्टरों औऱ तीन विमानों को शामिल किया गया। इस अभियान में  प्राचीन काल के सामान और प्राचीन सांस्कृतिक आदान प्रदान की वस्तुए शामिल हैं। ये भारत, फारस औऱ अब के इलाकों की महान सभ्यताओं की प्रतीक  हैं।

इस मार्ग में सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास की झलक भी मिलती है । इस इलाके में  आपसी व्यापार की वजह से हिंद महासागर के निवासियों के बीच आपसी आदान प्रदान को भी  बढ़ावा मिला।  समुद्री व्यापार मार्ग की राह में निकलने की शुरुआत  केरल से करने की विशेष अहमियत है। प्राचीन काल में केरल एक महत्वपूर्ण व्यापारिक बंदरगाह रहा है। इसके तटों पर 15 सौ सालों का पोत निर्माण और समुद्री व्यापार का लम्बा इतिहास रहा है।

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