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स्पेशल रिपोर्ट : दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत को हरी झंडी जल्द

नई दिल्ली। इस साल का पहला छमाही नौसैनिक कमांडर सम्मेलन यहां 11 मई को सम्पन्न हुआ जिसमें नौसेना के लिये विचाराधीन कई युद्धपोतों का निर्माण कार्य जल्द शुरू करने के लिये जरूरी कदम उठाने पर चर्चा की गई। इसमें देश के दूसरे स्वदेशी  विमान वाहक पोत के निर्माण को हरी झंडी देने पर भी विचार किया गया।





उल्लेखनीय है कि कोच्चि बंदरगाह पर इन दिनों देश का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत बन रहा है। करीब चालीस हजार विस्थापन क्षमता वाला यह पोत अगले साल नौसेना को परीक्षण के लिये सौंपे जाने की उम्मीद है। देश में बनाया जाने वाला दूसरा विमानवाहक पोत- विशाल – करीब 65 हजार टन विस्थापन क्षमता वाला होगा। नौसेना के डिजाइन विभाग ने इस पोत का डिजाइन कार्य पूरा कर लिया है और अब इसका निर्माण कार्य शुरू करने की  मंजूरी की प्रतीक्षा है।

कमांडर सम्मेलन के उद्घाटन में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने वादा किया था कि भारतीय नौसेना को ऐसा बनाएंगे कि हिंद महासागर में उसका लोहा सभी मानेंगे। इसके लिये नौसेना के जिन युद्धपोतों को देश या विदेश से हासिल करने का फैसला लटका है उन पर भी कमांडर सम्मेलन में विचार किया गया।

सम्मेलन में रक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि हिंद प्रशांत इलाके में भारतीय नौसेना को अपनी समुचित भूमिका निभाने लायक बनाने के लिये जरूरी फैसले जल्द लिये जाएंगे। यह तय किया गया कि अधिक से अधिक युद्धपोतों का निर्माण भारतीय शिपयार्डों में ही हो ताकि देश के युवकों को ही रोजगार मिले। नौसेना ने 2015 में 15 साल का स्वदेशीकरण योजना बनाई है जिसमें भारतीय उद्योग से भाग लेने को प्रेरित किया  जा रहा है।

सम्मेलन के दौरान नौसेना की मिशन आधारित तैनाती योजना की भी समीक्षा की गई। इसके तहत दूसरी नौसेनाओं के साथ सूचना आदान-प्रदान करने और द्विपक्षीय साझा अभ्यासों के जरिये नौसैनिक कूटनीति को भी बढ़ाने पर विचार किया गया।

भारतीय नौसैनिक पोतों की समाघात उपलब्धता बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई। नौसैनिक कमांडरों ने भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के अलावा थलसेना और वायुसेना के अध्यक्षों के साथ भी बैठकें की।

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