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स्पेशल रिपोर्ट: एस-400 मिसाइल पर अमेरिका कार्रवाई करने से बचा

एस- 400 डिफेंस सिस्टम

नई दिल्ली। रूस से एस- 400 एंटी मिसाइल का करीब सवा पांच अरब डॉलर का सौदा सम्पन्न करने के बाद अमेरिकी प्रशासन के कड़े रुख के बावजूद भारत ने कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप  ही फैसला लेगा। अमेरिका ने इस बारे में अपनी धमकियों के अनुरूप अब तक भारत के खिलाफ किसी कार्रवाई का ऐलान नहीं किया है।





गौरतलब है कि रूस से एस-400 मिसाइल सौदा सम्पन्न होने के कुछ दिनों बाद अमेरिकी रा्ष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने धमकी भरे स्वर में कहा था कि भारत को जल्द ही अमेरिका का फैसला पता चल जाएगा। यह एंटी मिसाइल दुश्मन के हमलावर लड़ाकू विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही ध्वस्त करने की क्षमता रखती है।

उल्लेखनीय है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के भारत दौरे में एस-400  एंटी मिसाइल प्रणाली का सवा पांच अरब डालर का सौदा सम्पन्न किया गया था। इसके पहले अमेरिकी प्रशासन ने भारत को आगाह किया था कि रूस से एस-400 मिसाइल का सौदा नहीं करे अन्यथा भारत पर भी कडे  प्रतिबंध लगाने पडेंगे।

लेकिन यह सौदा सम्पन्न होने के तीन सप्ताह बाद भी अमेरिका से अब तक भारत के खिलाफ कार्रवाई करने वाला कोई फैसला घोषित नहीं किया गया है। इस बीच भारत ने ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों  पर बातचीत के लिये गत शुक्रवार को भारत आए अमेरिकी विशेष दूत ब्रायन हुक को भारत का पक्ष समझाया है। यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि ईऱान  पर भारत के रुख से अवगत कराया गया है। प्रवक्ता ने खुल कर नहीं कहा कि भारत का क्या रुख है लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि भारतीय अधिकारियों ने उन्हें समझाया है कि ईरान का खनिज तेल भारत की अर्थव्यस्था के लिये कितनी अहमियत रखता है। समझा जाता है कि अमेरिकी दूत ने भारत के रुख से सहानुभूति जताई है लेकिन कहा है कि भारत को ईरानी तेल पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे खत्म करनी होगी।

गौरतलब है कि अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बाद चार नवम्बर की अंतिम तारीख घोषित करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा है है कि तब तक ईरान से तेल आयात रोक दे। यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिकी प्रतिबंधों के अनुरूप भारत ने ईरान से तेल आयात का स्तर घटाया है प्रवक्ता ने इसका सीधा जवाब नहीं दिया। प्रवकता ने कहा कि प्रतिबंधों के मसले को लेकर अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत चल रही है और इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

 

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