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स्पेशल रिपोर्टः परमाणु युद्ध के माहौल में दुश्मन पर हमले का अभ्यास

राजस्थान के बीकानेर जिले में सूरतगढ़ के निकट महाजन फील्ड फायरिगं रेंज में इन दिनों एक वृहद युद्धाभ्यास शुरू हुआ है जिसका मकसद परमाणु युद्ध के माहौल में दुश्मन पर हावी होना है। करीब 20 हजार सैनिकों के साथ दक्षिण-पश्चिम कमांड की विभिन्न यूनिटों को इस अभ्यास में लगाया गया है।





थलसेना और वायुसेना के इस साझा आपरेशन का उद्देश्य दोनों के बीच तालमेल से दुश्मन पर हमले की रणनीति को पुख्ता बनाना है। जमीनी युद्ध छिड़ने पर वायुसेना के लड़ाकू औऱ टोही विमान किस तरह थलसेना के टैंकों औऱ तोपों के अलावा मिग-35 जैसे हमलावर हेलीकॉप्टरों को हवाई सुरक्षा आवरण दिया जाए इसका अभ्यास किया जा रहा है।

परमाणु हमले के प्रभावी जवाब के लिए तैयार हो रहा है भारत

करीब एक महीने तक परमाणु माहौल में चलने वाले इस अभ्यास में जिस तरह थलसेना वायुसेना के सहयोग से युद्ध ल़ड़ने के लिये रणनीति तैयार कर रही है उससे साफ है कि पाकिस्तान के परमाणु हमले के प्रभावी जवाब के लिये भारत तैयार हो रहा है। पाकिस्तान यदि परमाणु बमों से हमला करता है या छोटे रणनीतिक परमाणु बमों का इस्तेमाल भारतीय सैन्य ठिकानों को नष्ट करने की कोशिश करता है तब उस हालत में पाकिस्तान की सेना को किस तरह मुंहतोड़ जवाब दिया जाए इसकी तैयारी के लिये भारतीय थलसेना ने वायुसेना को साथ ले कर विजय प्रहार नाम का यह अभ्यास आयोजित किया है।

अभ्यास में भाग ले रहे हैं वायुसेना के सैंकड़ों विमान

यहां थलसेना के अधिकारियों ने बताया कि इस अभ्यास में वायुसेना के सैंकड़ों विमान भाग ले रहे हैं जिसमें सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000 , मिग-21 , जगुआर और मिग-27 लड़ाकू विमान शामिल हैं। थलसेना ने इस अभ्यास में अपने हजारों टैंकों और तोपों को उतारा है। इन्हें दुश्मन के हमले को झेलने और जवाबी हमला करने के लिये हर क्षण की जरूरी खुफिया जानकारी और सूचनाएं मिल रही हैं। मुख्य युद्धक टैंकों में अर्जुन,  टी-90 औऱ टी-72 टैंकों को उतारा गया है जबकि तोपों में बोफोर्स को भी शामिल किया गया है।

सिखाई जा रही है दुश्मन के इलाके में घुसने की रणनीति

अधिकारियों ने बताया कि एक महीने तक चलने वाले इस अभ्यास में सैनिकों को दुश्मन के इलाके में घुसने की रणनीति व्यवहार में लाना सिखाया जा रहा है। अभ्यास के दौरान दक्षिणी पश्चिमी वायुसैनिक कमांड की  विभिन्न टुक़डियां नेटवर्क सेंट्रिक माहौल यानी इलेक्ट्रानिक युद्ध औऱ सूचना युद्ध के माहौल में युद्ध लड़ने का अभ्यास करेंगी। इसमें आधुनिक सेंसरों का एकीकृत इस्तेमाल करना शामिल है। अभ्यास के दौरान हमलावर हेलीकॉप्टरों को हवाई समाघात भूमिका में स्पेशल फोर्सेज के जवानों को दुश्मन के इलाके में उतारना शामिल किया गया है।

भारतीय थलसेना में दक्षिणी पश्चिमी कमांड की स्थापना 15 अप्रैल, 2005 को की गई थी। इसका मुख्यालय जयपुर में है। लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मैथसन इसके कमांडर हैं। इस कमांड में वन कोर और टेन कोर शामिल है।

 

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